वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व का जंगल।
खड्डा। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल से निकलकर एक महिला को फिर बाघ ने मार डाला है। इससे लोग भयभीत हैं। वाल्मीकी टाइगर रिजर्व व सोहगीबरवा वन्य जीव अभयारण्य के जंगल की सीमा खुली हुई है। इस वजह से हिंसक जानवर आसानी से बाहर निकलकर रिहाइशी इलाके में लोगों के लिए खतरा बन रहे हैं। यह मौत कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि एक वर्ष पहले बाघ के हमले में 9 लोगों की जान चली गई थी। एक बाघ को आदमखोर घोषित कर गोली मार दी गई थी।
जनपद से सटे बिहार प्रांत के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व का 899.38 वर्ग किलोमीटर हिस्सा जंगल है। इसमें लगभग 54 बाघ हैं। तेंदुआ की संख्या भी अच्छी खासी है। जंगल की सीमा खुली हुई है। इसी तरह कुशीनगर जनपद से ही महराजगंज जनपद का सोहगीबरवा वन्य जीव अभयारण्य जंगल है। इसमें भी बाघ, तेंदुआ सहित हिंसक जानवर हैं।। इस जंगल की भी सीमा खुली है। दोनों जंगलों से खड्डा क्षेत्र की सीमा जुड़ती हैं। इसके साथ ही बिहार के लगभग 150 गांवों सहित संवेदनशील जोन में 260 गांव जुड़े हुए हैं। जंगल की सीमा पूरी तरह खुली होने के कारण हिंसक जानवर और अन्य जीव-जंतु ग्रामीण क्षेत्र में आ जाते हैं। रविवार की शाम जनपद से सटे बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से निकले बाघ ने चिल्होरिया देवी को मार डाला।
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एक साल पहले बाघ की दहशत से कांपते थे लोग-
पिछले साल 2022 में वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व के जंगल से निकले बाघों के हमले में 40 वर्षीय बविता देवी व उनके सात साल के पुत्र शिवम, 35 वर्षीय संजय महतो, 12 साल की बगड़ी कुमारी, 65 वर्षीय रामप्रसाद उरांव, 40 वर्षीय प्रेमकुमारी देवी, 60 साल के धर्मराज काजी, 50 वर्षीय पार्वती देवी और 12 वर्षीय राजकुमार बैठा की बाघ के हमले में मौत हो गई थी। घायलो की संख्या भी अच्छी खासी थी।
इसके पहले खड्डा क्षेत्र के लखुआ लखुई, कोपजंगल आदि क्षेत्रों में वर्ष 2021 में खड्डा के तत्कालीन रेंजर बीके यादव सहित 14 लोगों को बाघ ने घायल कर दिया था। इसी तरहं तेंदुआ ने भैसहा गांव के कोटवा टोला में घुसकर 6 वर्ष की बच्ची व 25 वर्ष की महिला को घायल कर दिया था। इसमें आरती की मौत हो गई थी। मदनपुर सुकरौली गांव की कोईली देवी को तेंदुआ ने मार डाला था।