नवगठित कुशीनगर नगर पालिका परिषद के क्षेत्र में शामिल किए गए गांवों के ग्राम प्रधान व अन्य लोगों ने मंगलवार को कसया ब्लॉक परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। इन लोगों ने नगर पालिका गठन के लिए मानकों की अवहेलना करने एवं प्रदेश सरकार पर अड़ियल रुख अपनाने का अरोप लगाया। लोगों की नाराजगी को देखते हुए तहसील परिसर में कई थानों की फोर्स तैनात की गई थी।
सपा सरकार ने कसया नगर पंचायत को नगर पालिका का दर्जा देते हुए कसया ब्लाक के गांव सेमरा धूसी, खोराबर, डिघवा बुजुर्ग, परसौनी खुर्द, मथौली, सोनबरसा, शाहपुर कुरमौटा, खेदनी, तेतरिया, धनहा उर्फ मल्लूडीह, विश्वमभरपुर, अनिरद्घवा, बेलवा दुर्गा राय, सबया, डुमरी, बेलवा पलकधारी, मुंडेरा रतनपट्टी, नरकटिया बुजुर्ग, मिश्रौली, बरवां जंगल, नरायनपुर, करमैनी प्रेमवलिया, झुंगवा, सिरसिया, सपहा आदि 41 ग्राम पंचायतों को भी नगर क्षेत्र में शामिल कर दिया था। इनमें से कई गांव कसया नगर पंचायत की सीमा से चार से पांच किलोमीटर तक दूर हैं। नगर पालिका क्षेत्र में शामिल ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधान इसका विरोध कर रहे हैं। प्रधानों ने सोमवार को डीएम को ज्ञापन सौंपकर आंदोलन की चेतावनी दी थी। मंगलवार को ब्लाक मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे ग्राम प्रधानों का कहना था कि पिछली सरकार ने केवल राजनैतिक लाभ के लिए ही उन गांवों को भी नगर क्षेत्र की सीमा में शामिल कर लिया था, जो अगले दो दशक तक भी शहर से नहीं जुड़ पाएंगे। नगर क्षेत्र में शामिल होने के कारण ग्राम पंचायतों को 14वां वित्त एवं मनरेगा के कार्यों के लिए आईडी नहीं दी जा रही है। इसकी वजह से ग्राम पंचायतों में विकास कार्य भी ठप हो गया है। ग्राम प्रधानों की मांग है कि नगर पालिका परिषद के लिए जारी अधिसूचना को निरस्त करते हुए ग्राम पंचायतों के मूल स्वरूप को बहाल किया जाए तथा विकास कार्य के लिए बजट जारी किया जाए।
इस मौके पर ग्राम प्रधान राजेश्वर तिवारी, अरविंद चतुरर्वेदी, शंभू निषाद, हरिकिशुन गुप्ता, कमरून निशा, प्रेमशीला देवी, राजेश्वर मणि त्रिपाठी, प्रमोद पांडेय, शकुंतला देवी, रामविलास, मुन्नी देवी, शकुंतला सिंह, सुजाता शाही, सरस्वती, इसरार अहमद, विनोद कुमार पांडेय आदि मौजूद थे।
पुलिस छावनी में तब्दील था परिसर
कसया। ब्लॉक परिसर में ग्राम प्रधानों की ओर से होने वाले धरना-प्रदर्शन को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सुबह से ही अतिरिक्त सतर्कता बरती। आंदोलन के दौरान किसी भी असहज स्थिति से बचने के लिए सुबह से ही आंदोलन स्थल पर कसया, तुर्कपट्टी और हाटा पुलिस के अलावा पीएसी के जवान तैनात थे। विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से निपट जाने पर सभी ने राहत की सांस ली।