इन दिनों हाजी माजिद का सबसे सुरक्षित ठिकाना गोपालगंज बिहार था। वहीं, तस्करी का रूट तुर्कपट्टी और कसया का इलाका। हाजी माजिद अक्सर राष्ट्रीय राजमार्ग से तस्करी में परहेज करता था। यही वजह था कि वह कसया सेवरही मार्ग होते हुए कभी फाजिलनगर होते हुए बड़हरा, बाढू चौराहा, कटेया होते हुए बिहार तो कभी समउर, पंचदेवरी, महुअवा के रास्ते बिहार निकल जाता था। इस दरम्यान समउर और कटेया चेकपोस्ट के पहले वह वैकल्पिक सड़कों का प्रयोग कर बिहार निकल जाता था। वह अपने साथ दोनों प्रांतों में ऐसे साथी को रखता था, जो दोनों जगहों की पुलिस गतिविधियों, थानों, चेकपोस्ट, पुलिस पिकेट आदि से वाकिफ हो। इस दौरान वह अपने तस्करी के काले धंधे में लंबे समय से लगा था।
तस्कर हाजी माजिद का दो रूप था। वह पूरे दिन लक्जरी कार से घूमकर तस्करी के रास्तों और पुलिस ठिकानों की रेकी करता था। साथ में गिरोह के सदस्य भी रहते थे। साथियों से नेटवर्क कायम रखने के लिए गोपालगंज से बिहार तक सफेद लक्जरी कार से आवाजाही करता था। इसका एक साथी मुठभेड़ में गिरफ्तार हुआ, लेकिन बिहार प्रांत और पड़ोसी जनपद गोपालगंज का साथी अभी पुलिस राडार से दूर है। जबकि जिस दिन हाजी मुठभेड़ में गिरफ्तार हुआ, उस दिन भी वह रात को अपने बिहार के उन्हीं साथियों से मिलकर आ रहा था।
जिस डीसीएम से हाजी माजिद पिछले रविवार को हरियाणा के डीसीएम से पशुओं की तस्करी कर रहा था। डीसीएम का मालिक हरियाणा के झज्जर का रहने वाला है। पुलिस डीसीएम के मालिक की भी कुंडली खंगाल रही है। वहीं हरियाणा से बिहार तक का पशु तस्करों का कनेक्शन भी तलाश रही है। आखिरी बार 2020 में उनकी गाड़ी शराब तस्करी में बिहार प्रांत के सिवान जिले में पकड़ी गई थी।