जगदीशपुरम को मिलेंगी शहरी सुविधाएं
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पडरौना।दो दशक से शहर व देहात के बीच लटके रहे जगदीशपुरम के लोगों को भी अब शहरी सुविधाएं मिलेंगी। नगर पालिका प्रशासन नोनियापट्टी आंशिक के इस इलाके को अपना क्षेत्र मानने को तैयार हो गया है। खुद नगर पालिका पडरौना के चेयरमैन ने इस मुहल्ले में सड़क, सफाई, पेयजल समेत अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए प्रयास करने की बात कही है।
पडरौना रेलवे स्टेशन व बेलवा चुंगी चौराहे के बीच बसे जगदीशपुरम मोहल्ले को नगर पालिका प्रशासन अब तक अपना क्षेत्र नहीं मानता था। वहीं नोनियापट्टी ग्राम पंचायत इसे नगर पालिका का क्षेत्र बताती थी। बीते 15 फरवरी को ‘अमर उजाला’ ने अपने अंक में वोटर कार्ड की राह देखते ढल गई जवानी शीर्षक से इस मोहल्ले के लोगों की व्यथा कथा बताई थी। इसके बाद 23 फरवरी को नगर पालिका परिषद में शामिल होंगे 29 गांव शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई थी। परंतु नगर पालिका के सीमा विस्तारीकरण के आदेश से खुश लोग यह जानकर सन्न रह गए कि सीमा विस्तार के लिए अधिसूचित इलाकों में जगदीशपुरम की जमीनों की गाटा संख्या ही नहीं है। अमर उजाला ने फिर इसकी पड़ताल की तब यह बात सामने आई कि नोनियापट्टी की जिस जमीन पर जगदीशपुरम मोहल्ला बसा है वह तो पहले से ही पडरौना नगर पालिका परिषद का हिस्सा है। इसके बाद छह मार्च के अंक में अब पता चला 1974 में पालिका में शामिल हुआ था जगदीशपुरम शीर्षक से प्रकाशित इस खबर का संज्ञान लेते हुए नगर पालिका के जिम्मेदारों ने भी छानबीन शुरू की। थोड़ी ना नुकूर के बाद आखिरकार उन लोगों ने भी यह माना कि जगदीशपुरम के लोगों के साथ इतने वर्षों तक धोखाधड़ी होती रही। हालांकि इसके बाद जवाबदेही से बचने के लिए कागजी घोड़े दौड़ाने का काम शुरू हुआ। मोहल्ले के लोगों ने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को ज्ञापन देकर शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। इसके बाद बुधवार को फिर एसडीएम पडरौना अजय नारायण सिंह को ज्ञापन देकर इस मोहल्ले की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई। इस पर एसडीएम ने लेखपाल से रिपोर्ट मांगी है। हालांकि लेखपाल मौखिक रूप से अपनी रिपोर्ट दे भी चुके हैं और अब उन्हें इसे लिखित रूप से देना है।