मंसाछापर। स्थानीय बाजार के एक अवैध अस्पताल में इलाज के दौरान शुक्रवार को नवजात की मौत हो गई। नाराज तीमारदारों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। मामला बढ़ता देख डॉक्टर और संचालक अस्पताल छोड़कर भाग गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों को शांत कराया। स्वास्थ्य विभाग की जांच में बिना पंजीकृत अस्पताल संचालित होने की पुष्टि हुई। टीम ने अस्पताल को सील कर दिया।
जटहां थाना क्षेत्र के अरनहवा जंगल गांव निवासी सुग्रीम चौहान की पत्नी खुशी देवी का पिपरासी एएनएम सेंटर पर 30 जून को प्रसव हुआ। प्रसव के बाद एएनएम ने जच्चा बच्चा को डिस्चार्ज कर दिया। घर जाने के बाद नवजात की तबीयत खराब हो गई। घर वाले 3 जुलाई को मंसाछापर कस्बे के जनता अस्पताल में ले गए। डॉक्टर ने पीलिया होने की बात कह भर्ती कर इलाज शुरू किया। शुक्रवार को दोपहर में नवजात की मौत हो गई।
तीमारदार इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे और पुलिस को सूचना दे दी। संचालक और अस्पताल के वर्कर फरार हो गए। मौके पर इंस्पेक्टर ओमप्रकाश तिवारी और विशुनपुरा सीएचसी के अधीक्षक डॉ. जीसान अलीम टीम के साथ पहुंच गए। निजी अस्पताल पर कोई डॉक्टर और संचालक नहीं मिला। स्वास्थ्य विभाग की जांच में पता चला कि जनता अस्पताल अवैध तरीके से संचालित हो रहा है। पुलिस की मौजूदगी में सीएचसी अधीक्षक ने अस्पताल को सील कर दिया। परिजनों ने नवजात के शव का पोस्टमार्टम कराने से इन्कार कर दिया और शव लेकर चले गए। सीएमओ डॉ. सुरेश पटारिया नेे बताया कि अस्पताल का पंजीकरण हुआ था। लेकिन नवीनीकरण नहीं हुआ था। अवैध तरीके से अस्पताल का संचालन हो रहा था। शिकायत मिलने पर टीम पहुंची थी। जांच के बाद अस्पताल को सील कर दिया गया है।
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पर्ची पर पांच डॉक्टरों का नाम
अवैध तरीके से चलने वाले जनता अस्पताल की पर्ची पर पांच डॉक्टरों के नाम हैं। लेकिन, जांच करने पहुंची स्वास्थ्य टीम को मौके पर एक भी डॉक्टर नहीं मिला। पर्ची पर मौजूद मोबाइल नंबरों पर टीम ने संपर्क करने का प्रयास किया। लेकिन मोबाइल रिसीव नहीं हुआ।