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ऐसी नीति बने जिससे प्रतिस्पर्धा बनी रहे

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ऐसी नीति बने जिससे प्रतिस्पर्धा बनी रहे
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- शिक्षक बोले- विद्यार्थियों के भीतर प्रतिस्पर्धा के भाव को बनाए रखना होगा
- अभिभावक बोले, कोरोना संक्रमण की वजह से लिया निर्णय सराहनीय
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। बिना परीक्षा कराए ही यूपी बोर्ड के होनहारों को नंबर आवंटन करने के लिए प्रक्रिया निर्धारण पर मंथन चल रहा है। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने प्रधानाचार्यों, शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों से इस पर सुझाव मांगा है। प्रधानाचार्यों व अध्यापकों का मत है कि ऐसी नीति निर्धारित की जाए जिससे कि प्रतिभावान छात्रों को उचित अंक मिल सकें और प्रतिस्पर्धा की भावना बनी रहे। इसके लिए पिछली परीक्षाओं को ही आधार बनाने की बात कही जा रही है।
जिले में 19 राजकीय, 55 वित्तपोषित समेत कुल 327 माध्यमिक विद्यालय संचालित होते हैं। इसमें हाईस्कूल और इंटर के एक लाख से अधिक परीक्षार्थी नामांकित हैं। कोरोना संक्रमण की वजह से इस वर्ष बोर्ड की परीक्षा निरस्त कर दी गई है।
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ऐेसे में सभी परीक्षार्थी उत्तीर्ण हो जाएंगे। परंतु इन उत्तीर्ण परीक्षार्थियों को अंकों का आवंटन कैसे हो इसके लिए मंथन चल रहा है। इस संदर्भ में बोर्ड की तरफ से एक मेल आईडी जारी कर प्रधानाचार्य, शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थियों से भी सुझाव मांगा गया है।
रूद्रापुर गांव निवासी रमेश कुमार गुप्ता का कहना है कि परीक्षा होती तो विद्यार्थियों की क्षमता का सही आकलन होता। हालांकि कोरोना संक्रमण को लेकर सरकार का लिया गया निर्णय सराहनीय है। छात्रों केे पिछले प्रदर्शन के आधार पर नंबर आवंटित किया जाना चाहिए।
इंटर के छात्र आदित्य तिवारी का कहना है कि यदि सभी विद्यार्थियों को सामान्य अंक मिलेगा तो बेहतर अंक पाने के लिए दिन रात पढ़ाई करने वाले छात्रों के साथ बेईमानी होगी। ऐेसे अंक निर्धारण करते समय पूर्व की परीक्षा के परिणामों को भी ध्यान रखना उचित रहेगा।
शिक्षक कमलेश शर्मा का कहना है कि परीक्षा से विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों व स्कूल प्रबंधन का भी मूल्यांकन होता है। बिना परीक्षा कराए ही नंबर देना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है। छात्रों की पिछली परीक्षा में उपलब्धि के अलावा आंतरिक मूल्यांकन को भी इसमें शामिल करते हुए नंबर देना उचित होगा।
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प्रधानाचार्य परिषद के जिलाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र मणि त्रिपाठी का कहना है कि परीक्षा से परीक्षार्थियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का भाव जागृत होता है। कम अंक पाने वाला छात्र और अधिक अंक पाने के लिए परिश्रम करता है और बेहतर अंक पाने वाला और बेहतर करने का प्रयास करता है। ऐसे में बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए अंक निर्धारण करते समय इस बात का विशेष ख्याल रखना होगा कि विद्यार्थियों के भीतर प्रतिस्पर्धा का भाव बना रहे।
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