कुशीनगर। विनाशकारी बाढ़ की त्रासदी सिर्फ नेपाल की सीमा तक सीमित नहीं रह गई है। नारायणी (गंडक) की तेज धार के साथ उस त्रासदी के निशान भारतीय सीमा तक पहुंच रहे हैं। जिस नारायणी के किनारे मछुआरे मछली और लकड़ी तलाशते थे, उसी में अब अपनों की तलाश कर रहे हैं। नदी में पुलिस और प्रशासन की टीम उतर गई है।
तमकुही और खड्डा क्षेत्र में गंडक नदी के किनारे का यह हाल है। गांव वालों का कहना है कि नदी में पानी के साथ शव बह रहे हैं, जिसमें से निकालना मुश्किल है। पनियहवा पुलि के नीचे मौजूद रामकेवल, प्रभुशंकर, तीन नंबर ठोकर के पास रामकृपाल सानी, जितेंद्र सिंह आदि ने बताया कि शुक्रवार को बीस से 25 शव पानी में बहते दिखे। तमकुही के लक्ष्मीपुर और धूमनगर ठोकर के बीच शव मिलने के बाद तहसील प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकाला। तटवर्ती गांव वालों का कहना है कि गंडक में यहां के मछुआरे रोज मछली पकड़ते हैं। उसी नदी में अब पुलिस और प्रशासन की निगाहें जिंदगी नहीं, मौत के निशान खोज रही हैं।
नेपाल में 26 अगस्त को फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है। ताजा अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल में मृतकों की संख्या सैकड़ों तक पहुंच चुकी है और बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। इस त्रासदी का असर भारत में आने वाली नदियों पर भी दिखाई दिया। नेपाल से निकलने वाली नदियां आगे चलकर नारायणी और फिर गंडक के रूप में भारत में प्रवेश करती हैं। इसी बहाव के साथ शवों के भारतीय क्षेत्र में पहुंचने की आशंका सामने आई है। महराजगंज में पहले ही गंडक नदी से कई शव बरामद किए जा चुके हैं। प्रशासन का दावा है कि नदी में बृहस्पतिवार को तीन शव मिलने के बाद एसडीआरएफ,एनडीआरएफ की टीम नदी में पूरे दिन शवों की तलाश करती रही, नदी के किनारे लगने वाले शव निकाले जा रहे हैं, लेकिन नदी के तेज धारा के बीच शव बहते हुए दिखाई दे रहे हैं, जिसे निकालना संभव नहीं है।