नवंबर में परियोजना के पूरे होने की उम्मीद, 16 अक्तूबर 2024 को शुरू हुआ था काम
पडरौना। कभी जलकुंभी और प्रशासनिक उपेक्षा की शिकार रही बौद्धों की पवित्र गंगा ''हिरण्यवती नदी'' जल्दी ही नए रूप में दिखेगी। महात्मा बुद्ध के महापरिनिर्वाण और अंतिम संस्कार स्थल (रामाभार स्तूप) के करीब बहने वाली इस ऐतिहासिक नदी के सुंदरीकरण का कार्य तेज कर दिया गया है। इस बदलाव से आने वाले दिनों में पर्यटकों की आमद बढ़ने और क्षेत्र की तस्वीर बदलने की पूरी उम्मीद है।
पर्यटन विभाग की तरफ से बौद्धकालीन हिरण्यवती के बुद्धा घाट से लेकर कसया-देवरिया मार्ग स्थित रामाभार पुल तक सुंदरीकरण कार्य कराया जा रहा है। इस परियोजना पर 16 अक्तूबर 2024 को काम शुरू किया गया था। कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कारपोरेशन लिमिटेड गोरखपुर को तीन अप्रैल 2026 को पूरा करने की अवधि तय थी लेकिन मियाद बीतने के छह महीने बाद भी पूरा नहीं हो पाया है लेकिन कार्यदायी संस्था की ओर से तेजी से काम पूरा कराया जा रहा है,ऐसे में काम नवंबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
कोट
पर्यटन विकास को लेकर लगातार विभाग की तरफ से निर्माण कार्य कराए जा हैं। बौद्धकालीन हिरण्यवती नदी के काम में कुछ अड़चनें आईं थीं,अब वह दूर हो गई हैं। कार्यदायी संस्था की ओर से अधूरे कार्यों को तेजी के साथ पूरा कराया जा रहा है। तैयार होने के बाद यह पर्यटकों व सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।
- डॉ. प्राण रंजन, पर्यटन सूचना अधिकारी, कुशीनगर
ये होगा आकर्षण का केंद्र
बौद्धकालीन हिरण्यवती नदी के किनारे सुंदरीकरण कार्य के पर्यटकों की सुविधा के लिहाज से संवार जा रहा है। ताकि यह पहुंचने वाले पर्यटक व सैलानी पवित्र नदी व उसकी ऐतिहासिकता से भी परिचित हो सकें। नदी के किनारे हर मौसम में बैठने के लिए आकर्षक बेंच, मुफ्त में पेयजल, आकर्षक पाथवे, प्राकृतिक वातावरण व सेल्फी पॉइंट आदि तैयार हो रहे हैं। इसके धरातल पर उतरने के बाद हर कोई नदी के किनारे शाम पहुंचकर, सतरंगी लाइटों के बीच में प्रवाहित जल की खूबसूरत छवि को निहार सकेंगे। यही नहीं इसके बनने से सुबह व शाम आसपास के लोग सुरक्षित और प्राकृतिक वातावरण में भ्रमण कर सकेंगे। वहीं नदी किनारे वन विभाग की तरफ से विकसित मियावाकी पद्धति से वन क्षेत्र स्थल पर बैठकर आनंद उठा सकेंगे।