पडरौना। वर्षों से देसी-विदेसी शराब, बीयर और मॉडल शॉप का ठेका चलाने वाले जनपद के बड़े ठेकेदारों की मंशा पर इस बार उत्तर प्रदेश सरकार की नई आबकारी नीति ने पानी फेर दिया। इस बार शुरू की गई ई-टेंडरिंग व्यवस्था के चलते ऐसे अधिकांश बड़े ठेकेदार दो-चार दुकानों में ही सिमट गए हैं, जिनके पास शराब की दर्जनों दुकानें हुआ करती थीं। यही नहीं उन्हें लाखों रुपये का नुकसान भी उठाना पड़ा है। वहीं इस लॉटरी सिस्टम में सौ से अधिक नए ठेकेदारों को एक से अधिक दुकानें मिल गई हैं।
जनपद में शराब के ठेका से मोटा मुनाफा लेने वाले अनुज्ञापी इस वर्ष भी टेंडर के लिए पूरी तैयारी में थे, लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इस वर्ष से शराब के ठेके के लिए नई आबकारी नीति लागू कर दी, जिसके तहत शराब के ठेकों का आवंटन ऑनलाइन कर दिया गया है। इसके बावजूद शराब की दुकानों के लिए ठेकेदारों ने जमकर दांव लगाया।
आबकारी विभाग की मानी जाए तो बड़े ठेकेदारों ने इन दुकानों के लिए 150 से लगायत 300 तक आवेदन किए थे, लेकिन उनके हिस्से में भी तीन-चार दुकानों से अधिक नहीं आ पाया। उदाहरण के तौर पर तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में शराब के ठेकेदारों के एक ग्रुप ने 150 से अधिक ऑनलाइन फार्म डाला था, जिसमें उसकी 20 लाख रुपये से अधिक रकम सरकार के खाते में गई, अन्य खर्चे हुए वह अलग। फिर भी लॉटरी सिस्टम में उसे एक भी दुकान नहीं मिल पाई है। ऐसे ही एक अन्य ग्रुप की पूर्व में करीब 20 दुकानें थीं। इस बार भी उसने शराब के ठेके के लिए 300 आवेदन किया था, लेकिन उसे तीन दुकानें ही मिल सकीं हैं।
पडरौना तहसील क्षेत्र में भी व्यापक स्तर पर शराब का ठेका चलाने वाले एक व्यक्ति को पांच दुकानों पर ही संतोष करना पड़ा है, वहीं एक और ठेकेदार की झोली में सिर्फ दो दुकानें ही आई हैं। हालांकि बीते वर्ष तक इनके पास दर्जन-दर्जन भर शराब की दुकानें हुआ करती थीं। ऐसे ही समऊर बाजार में एक नए आदमी ने करीब एक दर्जन फार्म ऑनलाइन डाले थे, जिसे छह दुकानें आवंटित हुई हैं। कमोबेश यही स्थिति जनपद के अन्य हिस्सों में भी रही।
जनपद में देसी शराब, विदेसी मदिरा, बीयर और मॉडल शॉप की कुल 344 दुकानें हैं, जिनमें देसी शराब की 185, विदेसी मदिरा की 76, बीयर की 63 और मॉडल शॉप की छह दुकानों सहित 330 का लॉटरी सिस्टम से सोमवार को आवंटन कर दिया गया। शेष 14 दुकानों के लिए टेंडर अभी कुछ दिन बाद होना है।
लॉटरी सिस्टम से हुए शराब के इस ठेके में पुराने ठेकेदारों को मायूसी हाथ लगी है। शराब के बड़े ठेकेदारों में किसी को एक भी दुकान नहीं तो किसी को दो-चार दुकानों में ही संतोष करना पड़ा है। सौ से अधिक नए आवेदकों को एक या इससे अधिक दुकानें आवंटित हुई हैं।
राजेश कुमार मिश्र, जिला आबकारी अधिकारी।