उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे बिहार के वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना में बाघ का शव मिला है। उससे कुछ दूरी पर हिरन और सुअर के शव भी मिले। रविवार को बाघ के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहर से मरने की पुष्टि हुई है।
वाल्मीकि टाइगर प्रोजेक्ट के गोनौली वन क्षेत्र में बाघ के मरने की सूचना मिली। मौके पर पहुंचे वनकर्मियों को 135 सेंटीमीटर लंबे बाघ का शव पड़ा मिला। उससे लगभग 100 मीटर की दूरी पर एक हिरन और 200 मीटर की दूरी पर एक सुअर का शव भी मिला। रविवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बाघ की मौत जहर से होने की बात सामने आई।
अनुमान लगाया जा रहा है कि तस्करों ने बाघों की खाल और हड्डियों के लिए हिरन और सुअर को जहर खिलाकर चारे के रूप में प्रयोग किया होगा। बाघ उनका मांस खाकर खुद शिकार बन गया होगा। बाघ का शव देखने से प्रतीत होता है कि उसकी मौत एक पखवारे पूर्व हुई होगी। विभाग बाघ की मौत के कारणों की जांच-पड़ताल में जुटा है।
इस संबंध में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के डीएफओ अमित कुमार ने बताया कि प्रथमदृष्टया बाघ की मौत जहरखुरानी से प्रतीत हो रही है।