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गंडक की कटान से गांव की सुरक्षा पर खतरा

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अहिरौलीदान के डीह टोला गांव से सटकर बह रही गंडक नदी। - फोटो : KUSHINAGAR
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गंडक की कटान से गांव की सुरक्षा पर खतरा
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नदी के मुहाने पर बसे अहिरौलीदान के डीह टोले पर संकट
तमकुहीरोड। यूपी बार्डर पर स्थित, गंडक नदी के मुहाने पर बसा अहिरौलीदान का डीह टोला अपने वजूद के संकट के दौर से गुजर रहा है। गांव का अधिकांश हिस्सा गंडक की कटान की भेंट चढ़ चुका है। पिछले अक्तूबर में 4.45 लाख क्यूसेक पानी का दबाव झेल चुके गांव के लोगों को आशंका है कि यदि अगले मानसून के आने के पहले इस गांव में कटान रोकने का पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया, तो अन्य गांवों की तरह इसका वजूद भी खतरे में पड़ सकता है। यूपी बिहार बार्डर पर स्थित अहिरौलीदान का अंतिम गांव डीह टोला पिछले कई सालों से बाढ़ व कटान की विभीषिका को झेलता आ रहा है। इसके चलते वजूद पर खतरा बढ़ता जा रहा है। इसकी विषम भौगोलिक स्थिति के कारण यहां कभी भी बाढ़ बचाव कार्य नहीं कराया गया है। इसके चलते गांव का आधा हिस्सा गंडक नदी की कटान की भेंट चढ़ चुका है और ग्रामीण पलायन कर चुके हैं।
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बीते अक्तूबर में जब वाल्मीकि नगर बैराज से गंडक नदी में 4.45 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। यह पूरा गांव बाढ़ की चपेट में आ गया था और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी थी। गांव के पूर्व प्रधान हीरालाल यादव ने बताया कि गांव में बड़ी आबादी है। इस गांव के बचाने का कोई प्रयास नहीं किया गया। इस ग्राम सभा के बैरिया टोला, कंचन टोला और चित्तू टोला का अस्तित्व नदी खत्म कर चुकी है। कचहरी टोला, खैरखुटा व नोनियापट्टी भी आंशिक रूप से कटान की भेंट चढ़ चुका है। ऐसे में गांव के लोगों को अब इसके वजूद की चिंता सताने लगी है। हर साल गंडक नदी के बाढ़ व कटान से प्रभावित सुजीत यादव, मिथलेश राय, सुरेश यादव, योगेंद्र सिंह, काली राय, सुरेश यादव, कलेक्टर सिंह, सुबाष यादव, सहदेव राय, राजनाथ सिंह और सुरेंद्र यादव सहित अन्य का कहना है कि समय रहते इस गांव में कटान रोकने के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए तो आगे चलकर दिक्कत होगी।
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इस संबंध में बाढ़ खंड तृतीय के एसडीओ एसके प्रियदर्शी का कहना है कि गांव और बांध की सुरक्षा को लेकर शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
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