टेकुआटार। प्राचीन शिव मंदिर परिसर में चल रहे नौ दिवसीय श्रीराम महायज्ञ के दौरान मंगलवार को अयोध्या से आए विजय शरण ने कहा कि राम नाम जप से बढ़कर कोई साधना नहीं है। भगवान का नाम-जप की महिमा अनंत है। जिसके प्रसाद से शिवजी अविनाशी एवं अमंगल वेश वाले होने पर भी मंगल की राशि हैं।
परम योगी शुकदेव जी, सनकादि सिद्धगण, मुनिजन एवं समस्त योगीजन इस दिव्य नाम-जप के प्रसाद से ही ब्रह्मानंद का भोग करते हैं। भक्त शिरोमणि नारद, भक्त प्रह्लाद, ध्रुव, अंबरीष, परम भागवत हनुमानजी, अजामिल, गणिका, गिद्ध जटायु, केवट, भीलनी, शबरी सभी ने इस भगवन नाम-जप से भगवत प्राप्ति की है। नाम जाप का प्रभाव सूक्ष्म किंतु गहरा होता है।
उन्होंने बताया कि जब लक्ष्मण ने मंत्र जप कर सीता की कुटी के चारों तरफ भूमि पर एक रेखा खींच दी। तो लंकाधिपति रावण तक उस लक्ष्मण रेखा को नहीं लांघ सके। भगवान के नाम का जप सभी विकारों को मिटाकर दया, क्षमा आदि दैवी गुणों को प्रकट करता है। उनके नाम के जप मात्र से दु:ख, चिंता, भय, शोक, रोग आदि निवृत होने लगते हैं। सुख-समृद्धि और सफलता की प्राप्ति में मदद मिलने लगती है। जिससे मनुष्य के अंदर शक्ति-सामर्थ्य प्रकट होने के साथ बुद्धि का विकास होने लगता है। उसका हृदय शुद्ध होने लगता है ऐसे करते-करते एक दिन उसके हृदय में भगवान का बिराजने लगते है। इस दौरान ओमप्रकाश मधु, विश्राम मद्धेशिया, जयप्रकाश चौरसिया, भोलानाथ, रामनरेश तिवारी, संतोष गुप्ता, दिनेश पाडेंय, अमरनाथ मद्धेशिया, श्याम कुमार, अमित मद्धेशिया, राजन आदि मौजूद रहे।