कुशीनगर। आधुनिक दौर की बढ़ती आपाधापी में तनाव और मानसिक उथल-पुथल से बाहर निकलने के लिए दुनियाभर में लोग ध्यान की ओर बढ़ रहे हैं। जिस ध्यान ने सदियों पहले मानव मन को स्थिर करने की राह दिखाई थी, उसी बुद्ध ध्यान योग की क्षमता और संभावनाएं अब वैश्विक चर्चा में हैं।
महात्मा बुद्ध की परिनिर्वाण स्थली ध्यान का ज्ञान बांट रही है जो आंतरिक संतुलन और मानसिक शांति का मार्ग बन रहा है। बुद्ध का संदेश ‘अत्त दीपो भव’ यानी अपने मन और अनुभव के प्रकाश से जीवन को समझने का आह्वान वैश्विक स्तर पर लोगों को खींच रहा है।
बौद्ध भिक्षु संघ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. महेंद्र महाथेरे बताते हैं कि थाईलैंड, जापान, श्रीलंका, लाओस पीडीआर, वियतनाम, कंबोडिया, दक्षिण कोरिया, अमेरिका और यूरोप सहित विभिन्न देशों से तीर्थ यात्री और भिक्षु यहां आते हैं। ध्यान और विपश्यना के पाठ पढ़कर ही नहीं, बल्कि स्थानीय भिक्षुओं से चर्चा करके भी बुद्ध की शिक्षाओं को समझने का प्रयास करते हैं। एक थाई पर्यटक कहते हैं कि, यहां की मौन शांति इतनी गहरी है कि कुछ ही मिनट में मन में शोर कम हो जाता है। स्थानीय युवाओं के लिए भी यह अनुभव नया और प्रेरक है। कई छात्र नियमित रूप से आकर आध्यात्मिक और मानसिक संतुलन पाते हैं।
बुद्ध पर शोध कर चुके इतिहासकार डॉ. श्याम सुंदर सिंह बताते हैं कि परिनिर्वाण मंदिर परिसर में सुबह का सन्नाटा और भिक्षुओं का मौन ध्यान अब केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं रह गया है। यह उस मानसिक शांति की खोज का हिस्सा बन गया है जिसकी कमी आज हर समाज महसूस कर रहा है।
स्थानीय बौद्ध भिक्षुओं का कहना है कि वे यहां किसी विधि या नियम के कारण नहीं आते, बल्कि इसलिए आते हैं कि यहां बैठते ही मन अपने आप ठहर जाता है। कम शब्द, ज्यादा अनुभूति, यही बुद्ध ध्यान की मूल शक्ति मानी जाती है।