पडरौना। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अब बाजार की मांग के अनुसार उत्पाद तैयार कर अपनी आमदनी बढ़ाने के साथ आत्मनिर्भरता की राह मजबूत करेंगी।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की ओर से समूह की महिलाओं को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से देशी उत्पाद तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके साथ ही उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग और बाजार में उनकी मांग को ध्यान में रखकर प्रशिक्षण और तैयारी कराई जाएगी।
समूह की महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
एनआरएलएम की टीम महिलाओं को यह जानकारी दे रही है कि क्षेत्र में किन उत्पादों की अधिक मांग है और ग्राहकों की पसंद के अनुसार किस तरह के उत्पाद तैयार किए जाएं। इससे महिलाओं को उत्पाद तैयार करने के बाद उसकी बिक्री के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और बाजार में खपत के हिसाब से उत्पादन किया जा सकेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में समूह से जुड़ी महिलाएं अचार, मसाले, पापड़, अगरबत्ती, खाद्य सामग्री समेत विभिन्न घरेलू और स्थानीय उत्पाद तैयार करेंगी। इन उत्पादों को बेहतर पैकिंग और ब्रांडिंग के साथ बाजार तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
विभाग का उद्देश्य महिलाओं को केवल उत्पाद बनाने तक सीमित न रखकर उन्हें उत्पादन से लेकर बिक्री तक की पूरी प्रक्रिया से जोड़ना है। एनआरएलएम के डीसी फैजल आलम ने बताया कि बाजार की मांग को समझकर उत्पाद तैयार करने से समूहों की महिलाओं को बेहतर आमदनी का अवसर मिलेगा। स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलने के साथ ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे। इससे महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी योगदान दे सकेंगी।
इसके लिए एनआरएलएम चिन्हित समूह की महिलाओं को प्रशिक्षित करेगा। इसकी तैयारी की जा रही है। बहुत शीघ्र प्रशिक्षण भी शुरू हो जाएगा।