हाटा। हाटा कस्बा में भारत फाइनेंश्यिल इंक्लूजन लिमिटेड 100 प्रतिशत सब्सिडरी (इंडसइंड बैंक) की शाखा का फील्ड अफसर गांवों में संचालित समूह की महिलाओं की किस्त वसूलकर फरार हो गया।
समूह से जुड़ी महिलाएं किस्त देने के बाद भी बैंक की कर्जदार बनी हुई हैं। इस मामले में बैंक के मैनेजर ने फरार कर्मचारी के खिलाफ केस दर्ज कराया है। पीड़ित महिलाओं का कहना है कि फील्ड अफसर को बैंक के कर्मचारी के रूप में ही रुपये दिए गए हैं। अब वह फरार हो गया तो इसकी जिम्मेदारी बैंक के अधिकारियों की है। वह ही इसका भुगतान करे। इस पचड़े में समूह की महिलाओं को क्यों फंसाया जा रहा है। महिलाओं का कहना है कि उनपर जो कर्ज दिखाया जा रहा है, वह बैंक के रिकाॅर्ड से खत्म होना चाहिए।
हाटा क्षेत्र के दस से अधिक गांवों में बैंककर्मियों ने समूह बनाकर महिलाओं को कर्ज दिया था। इसके लिए बैंक की ओर से नियुक्त फील्ड अफसर सप्ताह में एक दिन गांव में समूह की महिलाओं की बैठक कर किस्त की वसूली करते हैं और ब्रांच में आकर जमा करते हैं। बैंक के हाटा शाखा में बरवापट्टी थाना क्षेत्र के अमवा दीगर निवासी बृजेश कुशवाहा फील्ड अफसर था और फील्ड में समूह की महिलाओं से जो किश्त वसूलने के बाद बैंक में जमा नहीं कर रहा था। क्षेत्र के नरायनपुर, चैनपुर, डूमरी, जमुआन आदि गावों में जाते थे। 22 जून 2024 को बैंक मैनेजर को पता चला कि 4.75 लाख रुपये समूह की किस्त फील्ड अफसर ने वसूलकर रख लिया है, बैंक के रिकाॅर्ड में इसे क्यों नहीं चढ़ाया गया, यह बैंक वालों को जानना चाहिए।
नरायनपुर गांव की शांति देवी ने बताया कि हम लोगों ने किस्त के रुपये मीटिंग करने आने वाले साहब को दे दिए था। उन्होंने बैंक में जमा नहीं किया तो इसमें हमारा क्या दोष है। महिलाओं ने मांग की कि बैंक अपने कर्मचारी से इसकी वसूली करे और हम लोगों के नाम दर्ज कर्ज को समाप्त करे।
उनका कहना है कि रुपये देने के बाद भी वह समूह की कर्जदार बनी हैं। चैनपुर गांव की फूलमती देवी और सरिता ने बताया कि इस मामले के पीछे बैंक के कर्मचारियों का दोष है, लेकिन उन्हें परेशान किया जा रहा है। हालांकि, बैंक मैनेजर ने बताया है कि बैंक के उच्चाधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी दे दी गई है। केस भी दर्ज हो गया है।
आप लोगों ने जो रुपये जाम किया है वह बैंक की ओर से आप लोगों के खाते में जाम करा दिया जाएगा। महिलाओं को आरोप है कि यह बैंक का विषय है, लेकिन इसके चलते दूसरे माइक्रो फाइनेंस कंपनी से अगर ऋण लेने की जरूरत हो तो नहीं मिलेगा।
ब्रांच मैनेजर उमाशंकर राजभर ने बताया कि जो किस्त समूह की महिलाओं ने दे दी है। उसके लिए बैंक के उच्चाधिकारी आपने स्तर पर कार्रवाई कर रहे हैं। वह महिलाओं को नहीं देना होगा, लेकिन कई समूह की महिलाएं इसी आधार पर शेष किस्त भी नहीं चुका रही हैं। यह गलत है, इसके लिए एजेंट इन महिलाओं से संपर्क कर रहे हैं।