सीताराम चौराहा। बरवा राजापाकड़ के टोला सपही बरवा में श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास ने कहा कि जीवात्मा का परमात्मा से एकाकार होना ही महारास है।
कथा वाचक विनय राघव दास ने कहा कि छोटा अंश जब अपने पूर्णांक को प्राप्त करता है तो वह महारास का स्वरूप बन जाता है। उन्होंने कहा कि सांसारिक आवरणों का पूर्णतया नष्ट होकर स्वयं को परमात्मा के प्रति समर्पित कर देना ही महारास में प्रवेश है। भगवान गोविंद ने गोपियों को महारास में प्रवेश देकर उनके मनोरथ को पूर्ण किया। उन्होंने कहा कि महारास को केवल लौकिक दृष्टि से नहीं, बल्कि जीव और परमात्मा के आध्यात्मिक मिलन के रूप में समझना चाहिए। उन्होंने शंखचूड़ दैत्य उद्धार, मथुरा गमन, कंस वध, यज्ञोपवीत संस्कार के बाद भगवान श्रीकृष्ण का अध्ययन, गुरु पुत्र को वापस लाकर गुरु दक्षिणा पूर्ण करना, जरासंध का मथुरा पर आक्रमण तथा काल यवन के अंत सहित अनेक प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया गया। इसके बाद कथा व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। इस दौरान आयोजकों की तरफ से वेदिका और सौम्या ने श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह की मनमोहक झांकी प्रस्तुत की गई।
इस दौरान प्रह्लाद गुप्ता, बबलू, रिंकू कसेरा आदि मौजूद रहे।