प्रदर्शन करते बिजली कर्मचारी। संवाद
संतकबीरनगर। विद्युत निगमों के निजीकरण के विरोध में मंगलवार को बिजली कर्मियों ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर धरना दिया। इस दौरान बिजली कर्मियों ने कहा कि निजीकरण के खिलाफ संघर्ष और तेज किया जाएगा। साथ ही दमन के विरुद्ध आरपार की चेतावनी दी।
धरना की अध्यक्षता कर रहे इंजीनियर मुकेश गुप्ता ने कहा कि ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन द्वारा उप्र सरकार को भेजे प्रस्ताव में कहा गया है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के निजीकरण का निर्णय जनविरोधी है, जो प्रदेश में बिजली की सस्ती और विश्वसनीय आपूर्ति को खतरे में डाल देगा। पिछले 475 दिनों में बिजली पंचायत, बिजली महापंचायत, रैलियों और जनसभाओं के माध्यम से जनता ने भी इस निर्णय के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया है। आगे इस आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
संघर्ष समिति के पदाधिकारी प्रिंस गुप्ता ने कहा कि कर्मचारियों और अभियंताओं का लगातार उत्पीड़न, धमकी और मानसिक दबाव बनाना न केवल अलोकतांत्रिक है, बल्कि यह प्रबंधन की दमनकारी नीति को भी उजागर करता है। इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। उन्होंने मांग किया कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल डिस्कॉम के निजीकरण का निर्णय तत्काल वापस लिया जाए और आंदोलन के दौरान कर्मचारियों और अभियंताओं के खिलाफ की गई सभी दमनात्मक और दंडात्मक कार्रवाइयों को बिना शर्त समाप्त किया जाए।
धरना में सुनील प्रजापति, अनंत कुमार, दिलीप सिंह , अमरनाथ यादव, सूरज प्रजापति, नारायण चंद्र चौरसिया, अशोक कुमार, आशीष कुमार, धीरेंद्र यादव वीरेंद्र मौर्य, प्रदुम्न कुमार, अशोक कुमार आदि कर्मी शामिल रहे।