मंसाछापर। विशुनपुरा ब्लॉक के बरवापुर्दिल गांव के जड़हा निवासी एक दिव्यांग को दो साल से दिव्यांग पेंशन नहीं मिल रहा है। प्रभारी मंत्री दिनेश प्रताप सिंह से शिकायत किया तो अफसरों ने जांच के लिए निर्देश दिया। जांच में पता चला कि सत्यापन के दौरान सचिव ने मृत दर्शा दिया है, जिम्मेदारों की लापरवाही सामने आने पर बीडीओ ने जांच का निर्देश दिया है।
बरवापुर्दिल गांव के जड़हा टोला निवासी नवनीत मिश्र दोनों पैर से दिव्यांग हैं। इनको दिव्यांग पेंशन मिलता था, लेकिन करीब दो वर्ष पूर्व दिव्यांग पेंशन मिलना बंद हो गया। इसके बाद यह अफसरों का चक्कर लगाने लगा, लेकिन पेंशन नहीं मिला। बुधवार को जिले में आए प्रभारी मंत्री से मिलकर शिकायत किया तो जांच कराया गया। पता चला कि वर्ष 2023 में सत्यापन के लिए इसका नाम आया था। गांव के सचिव ने इसे मृत दिखाकर रिपोर्ट भेज दी है, इसके चलते इसको पेंशन नहीं मिल रहा है जबकि हकीकत में दिव्यांग अपने पेंशन के लिए सरकारी कार्यालयों का चक्कर लगा रहा है। जिंदा व्यक्ति को कागजों में मृत दिखाने का मामला सामने आने के बाद बीडीओ ने जांच के लिए निर्देश दिया है। इसको लेकर जिम्मेदारों में खलबली मची है।
जरार के सचिव अनूप दुबे ने कहा कि हमारे गांव का इस नाम का कोई दिव्यांग व्यक्ति नहीं था। पहली बार रिपोर्ट दूसरे गांव का व्यक्ति होने का रिपोर्ट भेजा गया, दोबारा फिर सत्यापन के लिए आया तो पंचायत सहायक की गलती से मृत दिखा दिया गया है, यह अभिलेखीय त्रुटि है।
बीडीओ विशुनपुरा रवि कुमार रंजन ने कहा कि यदि दिव्यांग जड़हा गांव का है और जरार गांव में सत्यापन के लिए सूची आई थी तो रिपोर्ट में इस गांव का व्यक्ति नहीं होने की रिपोर्ट लगती चाहिए थी, न कि मृत होना लिखा जाना था। यह मामला गंभीर है। यह जिम्मेदारों की लापरवाही है। इसकी जांच कराई जा रही है, जो भी दोषी मिलेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।