तमकुहीरोड। सेवरही क्षेत्र में गंडक नदी पर दो अलग-अलग स्थानों पर पीपा पुल लगवाने की मांग लंबे समय से लोग करते आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि गंडक नदी पर दो जगह पीपा पुल लगने से दोनों तरफ बसी करीब 40 हजार की आबादी को आवागमन के साथ खेती किसानी के कार्यों में सुविधा मिलेगी और सुरक्षित तरीके से आवाजाही कर सकेंगे। लोगों का आरोप है कि नदी पर पीपा पुल नहीं होने से नाव के सहारे आते-जाते हैं,जिससे उन्हें खतरे होने का भय बना रहता है। नदी में पूर्व में नाव डूबने आदि की घटनाएं हो चुकी हैं। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से पीपी पुल लगवाने को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती रही है। हालांकि इस मामले को अब गंभीरता से लेते हुए स्थानीय विधायक डा.असीम राय ने सदन में भी गंडक नदी पीपा पुल लगवाने के लिए मांग उठाई है तो लोगों को इससे बल व समर्थन मिला है।
बता दें कि सेवरही क्षेत्र में पिपराघाट के नरवाजोत से अहिरौलीदान तक लगभग साढ़े सत्रह किलोमीटर की दूरी में गंडक नदी का किनारा है। पहले नदी का जलप्रवाह एपी बांध से काफी दूर था, लेकिन एक दशक में नदी के जलप्रवाह से हुए कटान के चलते बांध से सटकर तो कही बांध से 100 से 200 मीटर की दूरी से प्रवाहित हो रही है। यह हालात बारिश के मौसम में जब वाल्मीकि नगर बैराज से पानी डिस्जार्च होता है तो जल ही जल दिखाई देता है। इस दौरान यहां के लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचकर समय गुजारते हैं।
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इन गांवों के लोग नाव से करते हैं आवागमन
गंडक नदी के बंधे के किनारे बसे पिपराघाट, जंगली पट्टी, घघवा जगदीश, बिनटोली, जवही दयाल, ततवा टोली, गौराहा, विरवट कोन्हवलिया, बाक खाश, नोनिया पट्टी, बाघा चौर, कचहरी टोला, अहिरौलीदान गांव के लोगों की खेती योग्य भूमि नदी के दूसरे तरफ है। यहां नदी पर कोई पुल नहीं होने से किसानों के साथ मजदूर जान जोखिम में डाल कर नाव से दूसरी तरफ जाकर कृषि का काम करते हैं। हालात यह है कि अब भी जब उनकी फसल पक कर तैयार हो जाती है तो उसे नाव से ही लाना पड़ता है, इसमें नाव डूबने का खतरा बना रहता है। इसलिए इन गांवों के लोग लंबे समय से जवही दयाल और अहिरौली दान गांव के पास पीपा पुल लगवाने की मांग करते आ रहे हैं। क्षेत्र के जेके सिंह, दीनानाथ सिंह, सहदेव चौहान, कृष्णा निषाद, बृजकिशोर साहनी, अशोक सिंह पटेल, गौतम सिंह, सुधीर यादव, ध्रुव निषाद ने कहा कि अगर दोनों जगहों पर पीपा पुल लग जाए तो खेती कार्य में उन्हें मदद मिलेगी और साथ में नाव डूबने जैसी घटना से आजादी मिल जाएगी।
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नाव से नदी पार करने में हो चुके हैं हादसे
प्रशासन की ओर से सेवरही क्षेत्र में साढ़े सत्रह किलोमीटर की लंबाई में बहने वाली गंडक नदी पर अब तक किसी भी पुल का निर्माण नही कराया गया है। इसके चलते नदी उस पार खेती करने के लिए जाने वालों का नाव ही एक मात्र आवागमन का साधन है। कई बार नाविक अपने नाव में क्षमता से अधिक लोगों को बैठा लेते हैं। इसके चलते नाव नदी में ही डूबने लगती है।
केस एक
- दो नवंबर 2024 को 30 लोगों से भरी नाव शाम को किसानों व मजदूरों को लेकर वापस लौट रही थी। उस दौरान नाव में लगी जनरेटर की पंखी अचानक से टूट गई। इस वजह से नाव नदी के बीच में ही फंस गई। सूचना पाकर मौके पर तहसील प्रशासन व तरयासुजान पुलिस की मदद से लोगों को सुरक्षित निकाला गया।
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केस दो
18 दिसंबर 2024 को भी 300 से अधिक किसानों और मजदूरों से भरी नाव जब देर शाम वापस लौट रही थी। उस दौरान नदी के बीच सिल्ट में नाव फंस गई। सूचना मिलते ही तहसील प्रशासन,सेवरही थाने की पुलिस और तरयासुजान पुलिस ने फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला।