तमकुहीराज। हाईवे पर संचालित फर्जी अधिकारी बनकर वसूली करने वाले गिरोह का मास्टरमाइंड मुखिया पर पूर्व में मुकदमे दर्ज हो चुके हैं लेकिन खाकी और खादी का संरक्षण मिलने के कारण इसका नेटवर्क नहीं टूट पा रहा है। मुखिया का कुशीनगर के अलावा बिहार के गोपालगंज तक नेटवर्क फैला है। इस गिरोह में तीस से अधिक युवक काम कर रहे हैं। एक जालसाज के जेल जाने और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वॉयरल होने के बाद हाईवे पर सक्रिय इस गिरोह को संरक्षण देने वालों के नामों की चर्चा भी तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार गिरोह के सदस्यों पर शिकंजा कसने में पुलिस की टीमें काम कर रही है। संभावित ठिकानों पर दबिश भी दे रही है।
इसकी मॉनिटरिंग खुद एसपी कर रहे हैं, हालाकि पुलिस कार्रवाई के लिए जांच-पड़ताल का हवाला देकर कुछ बताने से परहेज कर रही है। हाईवे पर फर्जी अधिकारी बनकर ट्रक चालकों व ट्रांसपोर्टरों से वसूली करने वाले गिरोह में शामिल सदस्यों का कार्य अगल-अलग है।
गिरोह से जुड़े गुर्गो के कार्य का विभाजन गिरोह का मास्टरमाइंड मुखिया यादव करता है। कार्य के लिए निर्धारित रकम प्रत्येक सदस्य को काम पूरा होते ही तत्काल दिया जाता है। गिरोह के सदस्यों की सक्रियता जिले हाईवे के स्थित विभिन्न थाना क्षेत्रों के अलावे पटहेरवा, तमकुहीराज, तरया सुजान व बिहार के गोपालगंज जिले के हाईवे से जुड़े थाना क्षेत्र के इलाकों में सर्वाधिक रहती है। ट्रक चालकों व ट्रांसपोर्टरों से ठगी का रकम चिन्हित बैंक खातों में मंगाई जाती है, जब एक बैंक खाते के लेन-देन की रकम निर्धारित मानकों से अधिक हो जाने और पुलिस की सक्रियता के बाद दूसरे बैंक खाते में ठगी की रकम मंगाई जाती है। गिरोह से जुड़े सदस्य इतने शातिर हैं कि पुलिस की सक्रियता से पूर्व ही भूमिगत हो गए हैं और ठिकाना भी बदल दिए हैं।
इनके अवैध कमाई से होने वाली आमदनी का हिस्सा शह देने वालों तक भी पहुंचता है। बिहार के अलावे हाईवे पर पटहेरवा थाना क्षेत्र के महुअवा काटा, लबनिया, तमकुहीराज थाना क्षेत्र के गाजीपुर बैरियर का इलाका व तरयासुजान थाना क्षेत्र के सलेमगढ़ स्थित टोल प्लाजा व बहादुरपुर पुलिस चौकी के आसपास के इलाकों है। तीन अगस्त को तमकुहीराज थाना क्षेत्र के हाईवे स्थित माधोपुर बुजुर्ग (मंझरिया) के समीप पहले से खडे एक ट्रक की फोटो खींचते स्थानीय लोगों ने हरिहरपुर निवासी कैफ को पकड़ा था। पूछताछ के दौरान पकड़े गए आरोपी से गिरोह से जुड़े दूसरे गुर्गों के बारे में पुलिस को जानकारी मिली थी। जानकारी के आधार पर पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। मुखिया के नेटवर्क से जुड़े लोगों के घर भी पुलिस की टीम पहुंच रही है, लेकिन अभी तक पुलिस के हाथ गिरोह का कोई भी सदस्य हाथ नहीं लगा है।