खडडा। दशहरा के दिन सियार के हमले में घायल 10 लोग इलाज के बाद घर लौट आए हैं, लेकिन उनके मन से सियार का खौफ नहीं निकल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि हमला करने वाले सियार दो थे, लेकिन घटना के बाद से एक सियार दिखा नहीं, जबकि दूसरे को लोग मार दिए थे। मारा गया सियार ही हमलावर था, ऐसा वन विभाग का दावा है। वन विभाग गांव पर नजर रख रहा है।
गांव वालों से मोबाइल पर बात कर गतिविधियों की जानकारी ले रहा है। तीन दिन पहले दशहरा के दिन खडडा क्षेत्र के ग्राम करदह व हथिया में सियार के हमले में महिलाओं सहित 10 लोग घायल हो गए थे।इनमे रूना देवी का उपरी होठ चबा गया था गोरखपुर में इलाज हुआ।इस क्रम में विंदा देवी का नाम काट लिया था।इसी तरह रमाशंकर, रोशनी, हरीलाल, अरविन्द, जंगली, संदीप, तपेन्द्र जख्मी हुए थे सभी का इलाज कराया गया है। इलाज के बाद घायल अपने घर लौट आए हैं। परंतु इनके मन से अभी भी खतरनाक दृश्य नहीं निकल पा रहा है। घटना के बाद वन विभाग की टीम ने एक सियार का शव बरामद किया था।
उम्मीद जताई जा रही है कि यह वही सियार था जो काट रहा था।गांव में इस बात की भी चर्चा है कि सियारों की संख्या दो थी, लेकिन इसका कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिला है। गांव वाले अभी भी हाथों में डंडा लेकर घरों से निकल रहे हैं, जानवरों को सुरक्षित स्थान पर बांध रहे हैं, वहीं बच्चों को घरों से नहीं निकलने दे रहे हैं। सरेह यो खेत में झुंड में जा रहे हैं। खड्डा की रेंजर अमृता चंद ने बताया कि सियार के शव का पोस्टमार्टम कराया गया है, अभी रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। गांव के लोगों से संपर्क बना हुआ है।घायलों की हालत में सुधार है।