-पर्यटकों को देखते ही घेर लेते हैं फूल-चीवर बेचने वाले, खरीदने तक पड़े रहते हैं पीछे
-पर्यटन थाने पर तैनात पुलिसकर्मी नहीं दिखते सक्रिय, फूल-माला बेचने की आड़ में जेब कतरे भी सक्रिय
फोटो है।
संवाद न्यूज एजेंसी
पकवा इनार (कुशीनगर)। तथागत की महापरिनिर्वाण स्थली में पर्यटकों के साथ अमर्यादित व्यवहार की घटनाओं से यहां की छवि धूमिल हो रही है। फूल-माला बेचने वाले पर्यटकों के पीछे तब तक पड़े रहते हैं, जब तक कि वे उनसे कुछ खरीद नहीं लेते। इस दौरान वे कभी उनके पैर पकड़ लेते हैं तो कभी कपड़े खींचने लगते हैं। इनकी की आड़ में जेबकतरे भी पर्यटकों की जेब साफ कर देते हैं। हर दो-तीन दिन पर इस तरह की शिकायत पर्यटक थाने पर पहुंचती है। कई बार तो छेड़खानी तक की घटनाएं हो चुकी हैं। पर्यटकों की सुरक्षा के लिए ही थाना बना पर वह सुरक्षा दे पाने में नाकाम साबित हो रहा है।
मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर में छठवीं शताब्दी प्राचीन बुद्ध की स्वर्ण आभायुक्त भव्य प्रतिमा, भू-स्पर्श मुद्रा में मांथा कुंवर मंदिर में बुद्ध प्रतिमा व बुद्ध का अंतिम संस्कार स्थल रामाभार स्तूप हैं। जहां श्रीलंका, वियतनाम, कोरिया, ताइवान, लाओस, कंबोडिया, म्यांमार, जापान, थाईलैंड, नेपाल, तिब्बत, मलेशिया, इंडोनेशिया सहित देश के कई राज्यों से भी पर्यटक और सैलानी आते हैं। मंदिर परिसर में घुसते ही पर्यटक फूल व चीवर विक्रेताओं के निशाने पर आ जाते हैं। बुद्ध मंदिर मार्ग पर विदेशी पर्यटकों की बस अथवा वाहन पहुंचते ही उन्हें घेर लेते हैं। फिर ये फूल विक्रेता पर्यटकों को झुंड के साथ सामान खरीदने के लिए विवश करते हैं। यहां तक कि एक पर्यटक के साथ तीन से चार विक्रेता तब तक उनके साथ दौड़ते हैं, जब तक कि वह पुरातत्व विभाग के गेट से प्रवेश नहीं कर जाते। फूल विक्रेताओं में ज्यादातर बच्चे हैं। यही हाल मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर, मांथा कुंवर मंदिर और रामाभार स्तूप स्थल की है। कई स्थानीय लोग पर्यटकों के साथ होने वाले इस अमर्यादित व्यवहार को लेकर बेहद परेशान हैं। उनका कहना है कि इस पर रोक लगनी चाहिए। इससे कुशीनगर की छवि धूमिल हो रही है।
कुशीनगर में पहुंच रहे पर्यटकों को दिक्कत हो रही है। यदि पर्यटन पुलिस उनके आगमन के समय मौजूद रहती, तो उन्हें परेशानी नहीं होती। फूल और चीवर बेचने वाले उन्हें घेर लेते हैं। इससे उन्हें आवाजाही में असुविधा होती है। बेचने के लिए उनके मुंह तक लेकर चले जाते हैं। -राधेश्याम सिंह, सिसवा।
पर्यटकों का दल जब व्याख्या केंद्र के पास पहुंचता है, तो फूल और चीवर विक्रेताओं का जमावड़ा लग जाता है। उन्हें घेर लेते हैं। पर्यटकों की तरफ से मना करने के बावजूद उनके पीछे-पीछे व्याख्या केंद्र के प्रवेश द्वार तक पहुंच जाते हैं। इसको लेकर तैनात पुरातत्व कर्मचारी भी परेशान होते हैं।-मजहर, अनिरुद्धवा।
-
कोट:-
-कुशीनगर में पर्यटन थाना के स्थापना का मकसद पर्यटकों व सैलानियों को सुविधाएं मुहैया कराना है। उन्हें किसी तरह की समस्या व असुविधा न हो, इसके लिए थाने में पुलिस तैनात हैं। पर्यटकों को कोई दिक्कत आ रही है तो पुलिस तैनात कराकर दूर कराया जाएगा। -कुंदन सिंह, सीओ, कसया।
इंसर्ट:-
17 अक्तूबर 2017 को हुई थी पर्यटक पुलिस की तैनाती
-पर्यटक सुविधाएं व समस्याओं को दूर करने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 17 अक्तूबर 2017 को कुशीनगर में पर्यटक पुलिस की शुरुआत की थी। इसमें 15 पुरुष व दो महिला कांस्टेबल की तैनाती की गई थी।
दिसंबर 2022 में शुरू हुआ था पर्यटन थाना
-थानाध्यक्ष समेत 21 पुलिस कर्मियों की तैनाती के साथ दिसंबर 2022 में कुशीनगर में पर्यटन थाने का शुभारंभ हुआ था। यह जिले के 22वें थाने के रूप में अस्तित्व में आया था। पर्यटक थाने पर एक थाना प्रभारी, एक एसआई, एक महिला एसआई, कांस्टेबल एवं चार महिला कांस्टेबल तैनात किए गए हैं। इसके अलावा तीन हेड कांस्टेबल भी हैं। यह पर्यटकों की सुविधाएं व समस्याओं को समझकर उनके निस्तारण करने पर आधारित थाना है।