कसया। नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर के सभागार में आयोजित प्रांतीय शिशु वाटिका प्रशिक्षण कार्यशाला के पांचवें दिन मुख्य अतिथि हेमचन्द ने कहा कि बालकों का निर्माण भारतीय संस्कृति से ओत-प्रोत होना चाहिए। भारतीय संस्कृति ही हमारी पहचान है।
कार्यक्रम का शुभारंभ क्षेत्रीय संगठन मंत्री हेमचन्द (पूर्वी उत्तर प्रदेश), प्रांतीय अध्यक्ष विनोद कांत मिश्रा, संभाग निरीक्षक दिवाकर राम त्रिपाठी, प्रदेश निरीक्षक जियालाल और प्रधानाचार्य छोटे लाल कुशवाहा ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
हेमचन्द ने कहा कि “मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, आचार्य देवो भव एवं अतिथि देवो भव” की शिक्षा बच्चों को देना आवश्यक है। जो दूसरों को कुछ देने की क्षमता रखता है, वही देवता कहलाता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को केवल कुशल जीवन ही नहीं, बल्कि सार्थक जीवन भी जीना चाहिए और सामाजिक, धार्मिक एवं शैक्षिक कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए। प्रांतीय अध्यक्ष विनोद कांत मिश्रा ने भी प्रशिक्षण कार्यशाला की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से आचार्याें की कार्य क्षमता और शिक्षण शैली में निखार आता है।
कार्यशाला 11 मई से प्रारंभ होकर 20 मई तक चलेगी। इसमें प्रांत के विभिन्न सरस्वती शिशु मंदिरों से कुल 35 आचार्या बहनें प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। कार्यक्रम का संचालन शिशु वाटिका सह प्रांत प्रमुख सरोज तिवारी ने किया। इस अवसर पर प्रांतीय शिशु वाटिका प्रमुख सीमा द्विवेदी, महर्षि अरविंद विद्या मंदिर के प्रभारी रणजीत उपाध्याय, प्रधानाचार्य छोटे लाल कुशवाहा, रेनू मिश्रा, कविता तिवारी, ममता गुप्ता, सत्यभामा, शिवांगी, ज्योति जायसवाल, ज्योति सिंह गागी आदि मौजूद रहे।