कसया। श्रीराम जानकी (मठ) कसया में बुधवार की शाम गीता जयंती समारोह का आयोजन किया गया। इसमें हरिद्वार से आए समारोह के मुख्य अतिथि दिव्यसागर ने कहा कि गीता जीवन का कल्याण करने वाला महाग्रंथ है। जब भी धर्म की हानि होती है तब किसी न किसी रूप में ईश्वर का अवतार होता है। धर्म के बिना जीवन अधूरा है। धरती पर 600 धर्म हैं।
दुर्योधन, धृतराष्ट्र व संजय की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जहां दूषित धन है, वहीं दुर्योधन पैदा होता है। धृतराष्ट्र व्यक्तित्व का अंधा है और संजय संयम के प्रतीक हैं। संयमी व्यक्ति ही दूसरों का मार्गदर्शन कर सकता है। जब कर्मयोग, भक्तियोग, ज्ञानयोग और क्रियायोग का समंवय होता है, तब मोक्ष की प्राप्ति होती है। इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान श्रीकृष्ण औऱ भगवत गीता के पूजन-अर्चन से हुआ। श्रीमद् भागवत गीता के अध्याय 12 का सामूहिक पाठ भी किया गया।
इस समारोह में रामआशीष शुक्ल, अवध बिहारी उपाध्याय, इंद्रासन प्रसाद संत, लवकुश पांडेय, सुदामा दास आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किया। अध्यक्षता महंत त्रिभुवन शरण दास और संचालन सुरेश प्रसाद गुप्त ने किया। आभार पुजारी देव नारायण शरण ने ज्ञापित किया।
इस अवसर पर डॉ. सीएस सिंह, चंद्रिका शर्मा, रामजी सिंह, पवन कुशवाहा, रबीश त्रिपाठी, राधेश्याम, मिश्री सिंह, श्यामलाल, हरेंद्र, राजेंद्र मिश्र, राधे आदि मौजूद रहे।