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कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए...

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कसया, रामजानकी घाट पर डूबते सूर्य को अर्घ्य देतीं महिलाएं। - फोटो : KUSHINAGAR
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कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए...
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- छठ घाटों पर गूंजे छठ माता के गीत
- आस्था से सराबोर रहा घर से लेकर छठ घाट
- व्रती महिलाओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को दिया अर्घ्य
पडरौना। कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए। होई ना बलम जी कहरिया, बहंगी घाटे पहुंचाय... सरीखे गीत छठ घाटों पर दिनभर बजते रहे। दिन के लगभग तीन बजे से ही व्रती महिलाओं की भीड़ छठ घाटों पर जुटने लगी। व्रती महिलाओं ने सूर्य षष्ठी और सूर्योपासना के बाद पानी में खड़े होकर अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया तथा संतानों और परिवार की सुख-समृद्धि एवं सलामती की कामना की। शाम को छठ घाटों पर मेला लगा रहा। रात में भी छठघाटों पर भक्ति जागरण के कार्यक्रम हुए। लोगों ने मनौती के अनुरूप छठ माता की पूजा-अर्चना की।
संतान प्राप्ति और उनकी लंबी उम्र के लिए मनाए जाने वाले छठ पर्व को लेकर इस वर्ष भी लोगों में जबरदस्त उत्साह रहा। डाला छठ की सामग्री जुटाने, पकवान बनाने से लेकर सभी प्रकार की तैयारी दिन के तीन बजे तक पूरी कर लीं। उसके बाद महिलाएं सिर पर डाला लिए छठ घाट पहुंचीं, जहां छठ माता की पूजा की तथा अंत में अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर आशीर्वाद मांगा। महिलाओं ने निर्जला उपवास किया था।
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पडरौना नगर के छावनी मोहल्ला स्थित शिवसागर पोखरा के दोनों छठघाट, नौका टोला स्थित सुराजी पोखरा, रामधाम पोखरा, बावली चौक के छठघाट सहित अन्य छोटे-बड़े छठघाटों पर श्रद्धालुओं ने पहुंचकर छठ माता और अस्ताचलगामी भगवान सूर्य की आराधना की। बच्चे खिलौने, पटाखे, मिठाइयां और अन्य सामान खरीदने में मग्न रहे। दिन ढलने के बाद लोग अपने घरों को पहुंचे। रात में कई घरों में कोशी भराई की गई। इस दौरान पुलिसकर्मी भी मुस्तैद रहे। विभिन्न संगठनों की ओर से छठ घाटों पर व्रती महिलाओं के साथ आने वाले लोगों के लिए चाय-नाश्ते का इंतजाम किया गया था। इसी तरह जनपद के अन्य हिस्सों में स्थित छठघाटों पर भी शनिवार को व्रती महिलाओं ने छठघाटों पर छठ माता और भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा-अर्चना की।
परंपरागत ढंग से हुई छठ माता की अराधना
तमकुहीरोड। सेवरही क्षेत्र के बांसी नदी के तट पर स्थित शिवाघाट, दमकल घाट, मलाही घाट, गौरी घाट, गोलाघाट, परसा उर्फ सिरिसिया घाट, रुक्मिणी घाट और गंडक नदी के तट पर स्थितपिपराघाट, जंगलीपट्टी, विरवट कोंहवलिया, बाघाचौर, अहिरौलीदान सहित कत्तौरा, अवदान टोला, सुमही संतपट्टी, पकड़ीयार पूरबपट्टी, राजपुर खास, जोगनी, दाहूगंज आदि जगहों पर रविवार को बड़ी आस्था के साथ छठ महापर्व मनाया गया। व्रती महिलाएं रविवार शाम पूजन सामग्री के साथ छठ घाट पहुंचीं और वेदियों पर पूजा अर्चना की। बाद में अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। इस दौरान सभी छठ घाटों पर पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। बिजली निगम की ओर से रोशनी व पथ प्रकाश की व्यवस्था की गई थी।
छठ घाटों पर रविवार को छठ पूजा सकुशल संपन्न कराने के लिए एसओ सेवरही संजय कुमार, संदीप यादव व शमशेर यादव सहित सेवरही के चेयरमैन श्याम सुंदर विश्वकर्मा, जिला पंचायत सदस्य शर्मा यादव, प्रधान प्रतिनिधि आनंद कुमार सिंह, रामनिहोरा यादव, संजय सिंह और आदित्य वर्मा आदि मौजूद थे।
पोखरे पर बने छठघाट पर लगी भीड़
रामकोला। कस्बे के खेतान चीनी मिल के पोखरे पर भी काफी भीड़ रही। व्रती महिलाओं ने छठ वेदी पर पूजा के बाद पोखरे में खड़ी होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की। दिन के तीन बजे से ही महिलाओं की भीड़ जुटने लगी थी। महिलाओं के साथ परिवार के लोग भी थे।
श्रद्धालुओं ने विधि विधान से की छठ पूजा-
हाटा। रविवार को क्षेत्र में ढलते सूर्य को महिलाओं ने अर्घ्य दिया। नगर के काशी विश्वनाथ मंदिर, बाघनाथ शिवमंदिर, खाकी बाबा मंदिर आदि छठ घाटों पर महिलाओं ने विधि विधान से पूजा अर्चना की। घाटों पर मेला जैसा माहौल दिखाई दिया। महिलाओं ने सूर्य भगवान से जीवन में सुख की शांति की कामना की।
हाटा के काशी विश्वनाथ मंदिर छठ घाट पर रविवार की शाम को महाआरती का आयोजन किया गया। बनारस से आए पुरोहितों ने सांसद विजय दुबे, विधायक मोहन वर्मा, अधिशासी अधिकारी अजय कुमार सिंह आदि की मौजूदगी में गंगा आरती की। इस दौरान छठ घाट पर मौजूद लोग मंत्रमुग्ध हो गए। छठ पूजा के लिए सभी घाटों को सुंदर ढंग से सजाया गया है। यहां डूबते सूर्य को अघ्य देने के बाद महिलाएं मंगल गीत गाती हुई अपने-अपने घरों को लौटीं। रात में विधि विधान से पूजा करने के बाद सोमवार की सुबह उगते सूर्य को भी अर्घ्य देंगी। इसके बाद छठ पर्व का समापन होगा।
जमीन पर लेटकर पहुंचे छठघाट
छितौनी। पुत्र की प्राप्ति के लिए एक श्रद्धालु जमीन पर लेटकर छठघाट पहुंचा। उसने डेढ़ किलोमीटर की दूरी जमीन पर लेटकर पूरी की।
लोक आस्था के छठ पूजा के अवसर पर पुत्र की प्राप्ति के लिए छितौनी के जोकहिया टोला निवासी 30 वर्षीय सुजीत गुप्ता जमीन पर लेटकर करीब डेढ़ किलोमीटर दूर छठ घाट पहुंचे। उनके आगे पत्नी रेखा अक्षत छिड़ककर आगे बढ़ रही थीं। इस आस्था को देखकर श्रद्धालु छठ मइया का जयकारा लगा रहे थे।
व्रती महिलाओं ने दिया अर्घ्य
लक्ष्मीगंज। क्षेत्र के लालाछपरा, धोधरही, खोटही और पगार आदि गांवों के पोखरे पर छठ पर्व के अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। व्रती महिलाओं ने छठ माता की पूजा की तथा भगवान सूर्य के अस्त होने पर उन्हें अर्घ्य दिया। उसके बाद गीत गाती हुई अपने घर चली गईं। रात में मनौती के अनुरूप कोशी भरी गई।
व्रती महिलाओं ने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की
उजारनाथ। तमकुही क्षेत्र के सेंदुरिया बुजुर्ग, मोगलपुरा, जवार भैंसहा, देवरिया वृत, लोहलंगड़ी, करमैनी, भेलया, सपही बुजुर्ग, सपही खास, तार विशुनपुर, खलवापट्टी,चंद्रौटा सहित अन्य गांवों में भी छठ महापर्व पूरी आस्था के साथ मनाया गया। व्रती महिलाओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान जंत्री, पारस, योगेश, अभिमान, इरफान, सुरेश, सत्यप्रकाश, प्रमोद, अंगद, बदरी, फुलेना, विभूति सहित काफी संख्या में लोग मौजूद थे।
मुस्तैद रही पुलिस, नाव में बैठकर किया निरीक्षण
गुरवलिया बाजार। सूर्योपासना के महापर्व छठ पूजा के अवसर पर रविवार शाम अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए व्रती महिलाएं छठ घाट पर मौजूद रहीं। छठ घाटों की सुरक्षा के लिए एसएचओ तुर्कपट्टी आशुतोष सिंह के नेतृत्व में थाने के पुलिसकर्मी तैनात थे। बरवा राजापाकड़ के बहुरिया टोला स्थित हनुमान सरोवर के किनारे मौजूद घाट पर काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। यहां एसएचओ ने सरोवर में नाव से भ्रमण कर व्यवस्था जांची। इस दौरान एसएसआई गिरधारी यादव, एसआई अभिषेक सिंह, एचसीपी अरविंद कुमार राय, कुश कुमार, रमेश कुमार मौर्य, विनय कुशवाहा, महिला कांस्टेबल सृष्टि सिंह, पूनम गोंड आदि थीं।
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व्रती महिलाओं ने दिया अर्घ्य, की पूजा
अहिरौली बाजार। क्षेत्र के सेंदुआर, बगरादेउर, छपिया, नवापार, हरपुर सुक्खड़, घोड़ादेउर, लक्षीराय, मुजहना, जगदीशपुर, बरडीहा, महुअवा, सखौली, कुसुम्हा, तिनहवा, खोठ्ठा बाजार, भैसही, बरसैना, रामपुर झुरियां, पकड़ी, सोहरौना, मुजडीहा, होलिया, परतावल, टीकर, सहजौली, बरवा बाबू आदि गांवों के घाटों पर महिलाओं ने पूजा-अर्चना के बाद डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
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