ढाबे पर छापेमारी करती पुलिस। स्रोत-सोशल मीडिया
कुशीनगर। एनएच-28 पर जिम्मेदारों की मिलीभगत नियम को दरकिनार को दौड़ने वाले लोडेड मालवाहनों और लंबी दूरी की लग्जरी बसों को जिले में इंट्री कराने वाला गिरोह काफी दिनों से सक्रिय था। हेतिमपुर टोल प्लाजा के पास संचालित सेठी ढाबा से इसका नेटवर्क संचालित होता था, पुलिस बस संचालक बनकर बात की तो खेल से पर्दा उठा। पुलिस ढाबा संचालक समेत दो को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। ढाबे से एक डायरी मिली है जिसमें कलक्ट्रेट के एक बाबू के अलावा परिवहन विभाग के कर्मचारियों व कई चर्चित लोगों का नाम मोबाइल नंबर दर्ज है। जांच डीएम, एसपी की निगरानी में हो रही है। सब कुछ ठीक रहा तो बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है। इससे परिवहन और जीएसटी विभाग के जिम्मेदारों में हड़कंप मचा है।
पिछले कुछ दिनों में हाइवे पर चलने वाली लंबी दूरी की लग्जरी बसों से लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बाद जब जांच शुरू हुई, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। मानक को दरकिनार कर दौड़ने वाले बसों के संचालन में प्रशासनिक स्तर पर भारी लापरवाही बरती जा रही थी। नियम-कानून को ताक पर रखकर बसों के संचालन के हाईवे पर सक्रिय एंट्री गैंग की मदद ली जाती रही है। केवल राजस्व की भारी हानि हो रही थी, बल्कि यात्रियों की जान-माल को भी खतरे में डाला जा रहा था। सूत्रों का कहना है कि इन लक्जरी बसों और ओवरलोड वाहनों के संचालन के लिए वाहन स्वामियों से प्रतिमाह मोटी रकम वसूली जाती है।
बदले में उन्हें टोकन या पहचान चिन्ह दिए जाते हैं, इसकी आड़ में पूरे महीने तक वाहन बिना किसी रोक-टोक के चलाए जाते हैं। बताया जाता है कि जिन वाहनों के पास यह टोकन होता है, वे जांच चौकियों और पुलिस टीमों के सामने से बिना किसी बाधा के गुजर जाते हैं। इसमें परिवहन विभाग की मिलीभगत सामने आई है। हाईवे पर एआरटीओ की सक्रियता के बाद भी यह खेल काफी दिनों से चल रहा था। इसका केंद्र बिंदु था हाटा कोतवाली क्षेत्र के हाईवे किनारे सेठी ढाबा। यहीं से वसूली, टोकन वितरण और वाहन संचालन की पूरी एंट्री बुक तैयार की जाती है। हाल ही में जब मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचा, तो जांच टीम ने गोपनीय तरीके से इस ढाबे पर छापेमारी की।
बताया जा रहा है कि छापेमारी के दौरान ढाबे के संचालक समेत दो लोगों को पुलिस हिरासत में लिया है। उनके पास से मिली एक डायरी में जिले के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के मोबाइल नंबर भी दर्ज मिले हैं, जिससे इस खेल के सरकारी संरक्षण में होने की आशंका है। सूत्रों का कहना है कि यदि ये साक्ष्य पुख्ता पाए गए, तो जांच की आंच परिवहन विभाग (एआरटीओ) और जीएसटी विभाग के कई अधिकारियों तक पहुंच सकती है। सूत्र बताते हैं कि प्राथमिक जांच में ही इस नेटवर्क द्वारा हर महीने करोड़ों रुपये की अवैध वसूली किए जाने की बात सामने आई है। डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि मामला संज्ञान में है। इसकी जांच चल रही है। इस खेल में जो भी शामिल होगा। उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।