तमकुहीरोड। गंडक नदी का डिस्चार्ज सोमवार को एक लाख क्यूसेक से नीचे आने के बाद भले ही तटबंधों पर दबाव कम हो गया है, लेकिन कटान का खतरा बना हुआ है। अभी भी नदी कई जगहों पर तटबंधों व ठोकरों से सटकर बह रही है तो कई जगहों पर नदी खेतों को धीरे-धीरे काटने में लगी है। इसे देखते हुए अभियंता तटबंधों की निगरानी में जुटे हुए हैं।
पिछले 20-25 दिन से गंडक नदी अपने पूरे शबाब पर है। पहले गंडक नदी ने नरवाजोत को निशाने पर लिया और किमी 1.700 पर बने ठोकर के साथ डाउन व अप स्ट्रीम के क्षेत्र में भी काफी तबाही मचाने के बाद अभी भी ठोकर व बांध की सुरक्षा के लिए खतरा बनी है।
वहीं, नदी चैनपट्टी, जवही दयाल, विरवट कोंन्हवलिया, बाक खाश, बाघा चौर, कचहरी टोला सहित अन्य कई स्थानों पर डिस्चार्ज में कमी आने के बाद भी ठोकर से सटकर बह रही है। जो कभी भी उसकी सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है।जबकि एपी बांध के किमी 4.500 और ठोकर नंबर चार के सामने नदी गन्ने व धान की फसल को काट रही है।
यहां भी विभाग मिट्टी से भरी बोरियों के साथ तैयारी में है। बावजूद इसके तटबंधों के किनारे बसे अरुण कुमार सिंह, रामेश्वर कुशवाहा, गौतम सिंह, सुनील निषाद आदि का कहना है कि डिस्चार्ज में कमी आने से भले ही तटबंधों पर पानी का घटा है, लेकिन इससे खतरा अभी कम नहीं हुआ है। क्योंकि बरसात अभी बाकी है और कभी भी गंडक नदी का डिस्चार्ज बढ़कर बांध व ठोकरों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
इस संबंध में एसडीओ रमेश यादव का कहना है कि किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए लगातार तटबंधों की निगरानी की जा रही है और सभी जगहों पर स्थिति सामान्य है।