कुशीनगर/कसया। अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट कुशीनगर से उड़ान में बाधा बन रहे अब सभी अवरोध समाप्त हो चुके हैं। आईएलएस (इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम) के ग्लाइड पथ लगाने में बाधा बन रहे मकानों को ध्वस्त करा दिया गया है। अब आईएलएस लगाने का कार्य शुरू हो गया है।
दो माह में इस कार्य को पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद एयरपोर्ट उड़ान के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएगा। वहीं एयरपोर्ट अथॉरिटी की ओर से उड़ान शुरू कराने के लिए तीन विमानन कंपनियों से वार्ता भी शुरू कर दी गई है। कंपनियों को एयरपोर्ट की अद्यतन स्थिति से अवगत कराया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को अत्याधुनिक संसाधनों से लैस करने के लिए वर्ष 2020 में आईएलएस और आईएफआर लगाने के लिए 30.14 एकड़ भूमि किसानों से ली गई थी। उसके बाद एयरपोर्ट पर डीवीओआर और आईएलएस सिस्टम लगाने का कार्य शुरू हुआ। डीवीओआर का इंस्टॉलेशन तो हो गया था, लेकिन आईएलएस के इंस्टाल में एयरपोर्ट के पास बने आठ मकान बाधा बन रहे थे। उनके ध्वस्तीकरण समेत अन्य बाधाओं को दूर कर अब ग्लाइड पथ लगाने के लिए निर्माण कार्य तेज कर दिया गया है। एयरपोर्ट प्रशासन का दावा है कि आईएलएस के ग्लाइड पथ लगाने से संबंधित अन्य कार्य को भी दो माह में पूरा करा लिया जाएगा। इसके बाद उड़ान का रास्ता साफ हो जाएगा।
इधर एयरपोर्ट अथॉरिटी की ओर से अकाशा, इंडिगो और जेटविंग्स एयरलाइंस से मेल के जरिए उड़ान शुरू कराने के लिए वार्ता शुरू कर दी गई है। विमानन कंपनियां निर्माण कार्य पूरा होने के बाद विजिट करेंगी।
उसके बाद उड़ान के लिए सहमति देंगी। दूसरी ओर कुशीनगर सांसद विजय कुमार दुबे, राज्यसभा सांसद कुंवर आरपीएन सिंह और देवरिया सांसद शशांक मणि त्रिपाठी की ओर से भी केंद्रीय उड्डयन मंत्री से मिलकर एयरपोर्ट से उड़ान शुरू कराने का प्रयास किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर आईएलएस के निर्माण कार्य में बाधा होने की वजह से विमानन कंपनियां यहां से उड़ान भरने को लेकर रुचि नहीं ले रहीं थीं। लेकिन इसके निर्माण कार्य पूरे होने के बाद उड़ान की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।
एयरपोर्ट से उड़ान शुरू होते ही कुशीनगर के पर्यटन विकास काे पंख लगेगा। इसके अलावा कुशीनगर समेत बिहार के पश्चिमी जिलों के लोगों को देश के बड़े शहर या विदेशों में जाने के लिए लखनऊ, दिल्ली और मुंबई नहीं जाना पड़ेगा।
वहीं अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थली कुशीनगर में आने के लिए बौद्ध श्रद्धालुओं के आवागमन की सुविधा मिलने पर संख्या में बढ़ोतरी हो जाएगी। पर्यटन विकास को पंख लग जाएंगे। सितंबर माह से पर्यटन सीजन शुरू होकर मार्च तक चलता है। पर्यटकों को यहां आने के लिए वाराणसी, दिल्ली और लखनऊ स्थित एयरपोर्ट पर उतर कर कार या बस से आना पड़ता है। कुशीनगर एयरपोर्ट से उड़ान शुरू होते ही कुशीनगर आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ उन पर आर्थिक बोझ भी कम लगेगा।