पिपरा घाट। एजेंट शुक्रवार को किस्त जमा करने के लिए आने वाला था, रुपये नहीं होने से कई सप्ताह से जुवैदा खातून किस्त जमा नहीं कर पा रही थी। अंतिम अवसर एजेंट दिया था। इसको लेकर तीन चार दिनों से महिला परेशान थी। पति से पैसे के लिए बात की तो वह बताया कि एक तारीख को वेतन मिलेगा तो भेजूंगा। बेटा से कहीं काम करने के लिए बोली। इसको लेकर मां और बेटा के बीच तू-तू मैं-मैं भी हुआ, इसको लेकर महिला चिंचित थी और बृहस्पतिवार की रात को आत्मघाती कदम उठा ली। इसके पहले भी जिले में एजेंटों की प्रताड़ना से कई महिलाए खुदकुशी कर चुकी हैं। सेवरही थाना क्षेत्र के मिश्रौली गांव निवासी जुवैदा खातून जीवन संवारने के लिए तीन माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से लोन ली थी। पति महाराष्ट्र में रहकर काम करता है। वह महीने में जो पैसा भेजता था, वह घर खर्च में ही खत्म हो जाता था, बड़ा बेटा इमरान घर पर ही रहता था। पड़ोसियों ने बताया कि शुक्रवार को एजेंट किश्त जमा करने के लिए आने वाला था। कई सप्ताह का किश्त बाकी थी जिसे जमा करने के लिए अंतिम समय जुवैदा ने लिया था, लेकिन किश्त जमा करने के लिए इसके पास रुपये की व्यवस्था नहीं हो सकी। बेटा से वह कई दिनों से बोल रही थी कि कही जाकर काम करो, लेकिन बड़ा बेटा काम पर नहीं जा रहा था। इसको लेकर बृहस्पतिवार को दिन में बेटे से कहासुनी भी हुई थी। बच्चे जब गांव में शादी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गए तो घर के अंदर खुदकुशी कर ली। इस घटना की जानकारी होने के बाद माइक्रो फाइनेंस कंपनी के एजेंट गांव में नहीं आया। तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में इसके पूर्व भी कई महिलाएं जहरीला पदार्थ खाकर या फांसी लगाकर खुदकुशी कर चुकी हैं। देर शाम को पोस्टमार्टम के बाद बेटे ने शव को मिट्टी दे दिया। पड़ोसियों ने बताया कि जुवैदा खातून की जब से शादी हुई थी तब से वह संघर्ष करती थी, बच्चों को किसी तरह पालन पोषण कर बड़ा की थी, लेकिन एजेंट कई बार इनको प्रताड़ित कर चुका था। दुदही, खड्डा, तमकुही, तरयासुजान आदि क्षेत्र बिहार से जुड़ा है। अशिक्षा को माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के एजेंट ढाल बनाकर शिकार बनाते हैं।