सकारात्मक सोच एवं त्वरित निर्णय की क्षमता ही काम आती है- त्रियुगी
कोईंदी बुजुर्ग में चल रही है श्रीराम कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीराज (कुशीनगर)। सकारात्मक सोच एवं त्वरित निर्णय लेने की क्षमता से ही व्यक्ति विषम परिस्थितियों से पार पा सकता है। अंतिम समय तक धैर्य बनाए रखने वाला व्यक्ति ही विजेता कहलाता है। यह काम तभी होता है, जब व्यक्ति को अपने पौरुष एवं भगवान की भक्ति पर विश्वास हो।
ये बातें कोईंदी बुजुर्ग स्थित पंचायत भवन पर चल रहे श्रीराम कथा के दौरान बुधवार को कथा वाचक त्रियुगी नारायण मणि त्रिपाठी ने कहीं। कथावाचक ने लंका दहन की कथा सुनाते हुए कहा कि लंका में एक से बढ़कर एक बलशाली राक्षस थे। जिनके समक्ष अपनी बुद्धिमत्ता एवं बल का प्रदर्शन कर हनुमान जी ने श्रीराम के पौरुष का लोहा मनवाया। साथ ही लंकावासियों के मन में भय भी पैदा कर दिया। यह तभी संभव हुआ जब हनुमान जी ने सकरात्मक सोच के साथ लंका के दरबार में भी अपने धैर्य को बनाए रखा।
इस दौरान रामेश्वर राय, जितेंद्र मिश्र, मनोरंजन शाही, रामपरीक्षण शुक्ला, काशीनाथ मिश्र, ईश्वर चंद्र, हरिहर कुशवाहा, दीनानाथ, अमन राय, अभिनव मिश्र, आशीष मिश्र, अमरनाथ यादव, आशुतोष राय आदि मौजूद रहे।