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Kushinagar News: आंखों के सामने घूम गया तबाही का 19 साल पुराना मंजर

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नारायणी नदी शव को निकालती एनडीआरएफ की टीम।स्रोत-सोशल मीडिया
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कुशीनगर। गंडक नदी में बुधवार को नेपाल से आने वाली प्रलयंकारी बाढ़ की चेतावनी और प्रशासनिक अलर्ट से एपी बांध पर मची अफरा-तफरी ने बांध के किनारे बसे गांवों के लोगों के जेहन में 19 साल पुरानी घटना की याद ताजा कर दी। बुधवार को सुुबह से देर रात तक एपी बांध पर 31 जुलाई 2007 वाला मंजर रहा। फर्क इतना था कि बुधवार को आने वाला खतरा टल गया, जबकि 19 साल पहले नारायणी (गंडक) नदी में साढ़े छह लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने से एपी बांध टूट गया था और तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के 40 से अधिक गांवों के लोगों को महीनों भीषण बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ी थी। खड्डा इलाके में भी बीस से अधिक गांवों के लोगों को बाढ़ की दुश्वारियां झेलनी पड़ी थीं। उसे याद कर लोग आज भी सिहर उठते हैं।
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बुधवार को नेपाल से गंडक नदी में आने वाली प्रलयकारी बाढ़ की अलर्ट और प्रशासनिक चेतावनी ने एपी बांध के किनारे बसे नरवाजोत, पिपरा घाट, जंगलीपट्टी, घघवा जगदीश, जवही दयाल, विरवट कोन्हवलिया, बाक खाश, बाघाचौर, नोनियापट्टी, अहिरौलीदान समेत कई गांवों के लोगों की बेचैनी बढ़ा दी। पूरी रात नदी की निगरानी और प्रशासन की ओर से बार-बार दी जा रही अलर्ट की सूचना से दहशत के बीच कटी। प्रशासनिक अमले के साथ आम लोग भी आधी रात तक तटबंधों की निगरानी करते रहे। जलस्तर में गिरावट के बाद अफसर भी सुबह चले गए।

सुबह पांच बजे एपी बंधे पर लोगों की आवाजाही ना के बराबर रही, जबकि बुधवार की रात गांव के अधिकतर लोग बंधे पर नजर आए। वर्ष 2007 की घटना के प्रत्यक्षदर्शी रहे क्षेत्र के मथुरा सिंह, भरत साह, पारसनाथ सिंह, रामायन राय, प्रभुनाथ यादव का कहना है कि उस समय भी इसी तरह लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने और सावधान रहने की मुनादी कराई गई थी। पूरा प्रशासनिक अमला लोगों को सुरक्षित करने में लग गया था।
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उस समय भी आधी रात तक सब कुछ ठीक था और नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था लेकिन आधी रात के बाद अचानक घघवा जगदीश के पास एपी बांध में रिसाव शुरू हो गया। उस समय बांध पर पानी का दबाव इतना तेज था कि देखते ही देखते बांध टूट गया और बाढ़ का पानी तेज रफ्तार से खेतों व घरों से होकर लगभग 40 गांवों में भारी तबाही मचाते हुए एन एच-28 तक पहुंच गया था। महीनों तक लोगों को बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ी थी। गांव केे लोग बाढ़ को लेकर अब भी अलर्ट हैं।

नारायणी नदी शव को निकालती एनडीआरएफ की टीम।स्रोत-सोशल मीडिया

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