थाई श्रद्धालुुओं ने की तथागत की विशेष पूजा अर्चना
चीवर चढ़ाकर की विश्व शांति की कामना
कसया। कुशीनगर के महापरिनिर्वाण स्थली के मुख्य मंदिर में शुक्रवार को थाई श्रद्धालुओं ने तथागत की विशेष पूजा करके चीवर चढ़ाया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने विश्व कल्याण की कामना की। कार्तिक पूर्णिमा बीतने के बाद से कुशीनगर में बौद्ध श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है।
लुंबिनी होकर ग्रुप लीडर चनीटा कल्यानमित्रा के नेतृत्व में कुशीनगर पहुंचे 29 सदस्यीय थाई भिक्षुओं और उपासकों ने मुख्य मंदिर परिसर स्थित भगनावशेषों के समीप बैठकर धम्म वंदना की। इसके बाद थाई दल ने तथागत बुद्ध की लेटी प्रतिमा का दर्शन कर पूजन अर्चन के साथ परिक्रमा की। बुद्ध को प्रिय कमल पुष्प अर्पित किया और तथागत को चीवर दान कर भिक्षुओं को संघ दान दिया। इसके बाद रामाभार स्तूप पहुंचकर पूजन किया।
दल ने बुद्धाघाट, मियावाक़ी वन का अवलोकन किया। टूरिस्ट गाइड और थाई सहित कई भाषाओं के जानकार मनोज कुमार प्रजापति ने बुद्ध स्थली के ऐतिहासिक, पुरातात्विक महत्व के बारे में दल को अवगत कराया। थाई दल यहां बुद्ध के जीवन से जुड़े पहलुओं की जानकारी पाकर काफी अभिभूत हुए।
थाई दल 13 नंवबर को बोधगया पहुंचा, जहां से राजगीर, नालंदा, सारनाथ, वाराणसी और लुंबिनी होते हुए बृहस्पतिवार को कुशीनगर आया। यहां से दल के सदस्य श्रावस्ती जाएंगे। वहां से 19 नंवबर को स्वदेश रवाना हो जाएंगे। इस दौरान सरिसा रोचनाचीन, किटिपत, चरीराट, कांनीशा थिप सु अन कान, रंगरत, थानु तो सुपल्लक, नान गुलक्स, थोंग मार्क, धनान चंतरुपंथ, कंचन इन ऑन, चुटीमा, नवरात चिंग सान, लमून, अरी, सैम टैंग आदि शामिल रहे।