कप्तानगंज (कुशीनगर)। तहसील में तैनात तहसीलदार चंदन शर्मा पर गंभीर आरोप लगा है। नियम को दरकिनार कर कप्तानगंज तहसील में तैनाती के दौरान अपनी मां के नाम से कस्बे में सोढ़ सोलह डिस्मिल जमीन बैनामा करा लिया।
नायब तहसीलदार पद के चार्ज के दौरान सिर्फ 14 दिन में जमीन का खारिज दाखिल का आदेश भी खुद कर दिया। मामला उजागर होने पर डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने हाटा तहसीलदार को जांच के आदेश दिए हैं।
बताया जाता है कि कार्रवाई से बचने के लिए तहसीलदार ने आनन-फानन अपनी मां से 15 अप्रैल को जमीन दूसरे को बैनामा करा दिया। हालांकि 22 दिन बाद भी खारिज-दाखिल नहीं हो सका है।
मूल रूप से देवरिया शहर के बांस देवरिया निवासी चंदन शर्मा वर्तमान में कप्तानगंज तहसील में तहसीलदार हैं। आरोप है कि 6 मार्च 2026 को अपनी निर्मला शर्मा पत्नी रामश्रय शर्मा के नाम कप्तानगंज उर्फ बसहिया में सोढ़ सोलह डिस्मिल जमीन चंद्रिका नेपाल से बैनामा कराया।
उस समय नायब तहसीलदार एकता त्रिपाठी अवकाश पर थीं और चार्ज तहसीलदार चंदन शर्मा के पास था। आनन-फानन में 20 मार्च को जमीन का खारिज-दाखिल कर दिया गया और खतौनी में नाम भी दर्ज हो गया।
नियम को दरकिनार कर तैनाती स्थल तहसील क्षेत्र में खरीदी गए कीमती जमीन का मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। उच्चाधिकारियों तक मामला पहुंचा तो खुद को फंसता देख 15 अप्रैल को तहसील क्षेत्र के एक व्यक्ति के नाम जमीन बैनामा करा दी गई।
जमीन बैनामा होने के 22 दिन बाद भी खारिज दाखिल नहीं हो सका है, जबकि तहसीलदार की मां के नाम बैनामा जमीन का खारिज दाखिल सिर्फ 14 दिन में हो गया था।
कप्तानगंज एसडीएम का कहना है कि अगर तैनाती स्थल पर कोई अधिकारी जमीन लेता है तो इसके लिए राजस्व परिषद से परमिशन अनिवार्य है। तहसीलदार ने राजस्व परिषद से अनुमति नहीं ली है इसलिए यह नियम विरुद्ध है।