एक घंटे बाद गांव से आई नाव और जाल तब टीम ने शुरू की नहर में तलाश
दुर्घटना के दौरान नहर में 14 हजार क्यूसेक था पानी, बहाव तेज होने से हुई दिक्कत
सिंचाई विभाग, आपदा और वन विभाग की टीम देर शाम तक नहर किनारे जमी रही
सिंचाई विभाग के अफसर वाल्मीकि नगर बैराज से नहर में पानी कम कराने में जुटे
संवाद न्यूज एजेंसी
खड्डा। नहरों में पानी जब बढ़ता है तो मगरमच्छ दिखाई देते हैं। लेकिन 22 वर्षीय मनोज को निगलने वाली घटना जिले की पहली है। इसकी खबर मिलते ही अफसर अवाक हो गए और खाली हाथ वन विभाग, आपदा और सिंचाई विभाग की टीम बचाव कार्य के लिए पहुंच गई। एक घंटे इंतजार के बाद गांव वालों ने एक नाव और जाल उपलब्ध कराई। तब जाकर युवक की तलाश शुरू हुई। लेकिन देर शाम तक पता नहीं चल सका था।
खड्डा थाना क्षेत्र के मदनपुर सुकरौली गांव से सटकर नहर बहती है। नेपाल में बारिश के बाद नहर में पानी भरा हुआ है। नहर से सटे गांव वाले शौच या खेती किसानी के काम के लिए नहर के किनारे जाते हैं।
लेकिन बुधवार को दोपहर में 22 वर्षीय मनोज पर मगरमच्छ की हमले और लापता होने की जानकारी जैसे ही गांव वालों को हुई, वे सहम गए। इसकी जानकारी होने पर एक घंटे बाद वन विभाग के रेंजर, दरोगा, आपदा और सिंचाई विभाग के अफसर पहुंचे। लेकिन बचाव कार्य के लिए किसी भी विभाग के अफसर अपने साथ कोई संसाधन नहीं ले गए। यह देखकर गांव वाले भी भौचक हो गए कि खाली हाथ आए हैं युवक की पानी में तलाश करने।
नदी में पानी का बहाव इतना तेज था कि नाव नहीं चल पा रही थी और जाल भी नहीं टिकी। सिंचाई विभाग के अफसर वाल्मीकिनगर बैराज पर संपर्क कर पानी बंद कराने के प्रयास में जुट रहे। शाम छह बजे तक बैराज बंद नहीं हो सका था। घटना के समय 14 हजार क्यूसेक पानी नहर में बह रहा था। इतने तेज बहाल में बचाव कार्य कर पाना संभव नहीं था। एनडीआरएफ की टीम भी बुलाई गई, लेकिन शाम तक नहीं पहुंच सकी थी।
मां से बोला था मनोज, अभी आ रहा हूं, आई मौत की खबर
खड्डा। घर से निकला मनोज मां से बोला था कि अभी थोड़ी देर में आ रहा हूं, मां उसे रोकना चाही लेकिन वह रुका नहीं। मनोज तो नहीं आया, उसके मगरमच्छ के हमले में लापता होने की खबर आई। घर वालों को विश्वास नहीं हुआ। जब वे नहर किनारे पहुंचे और भीड़ देखने के बाद प्रत्यक्षदर्शी घुठन की बातों को सुनने के बाद बदहवास हो गए। गांव वालों ने किसी तरह संभाला। घर वालों की आंखें पानी के तेज बहाव में जवान बेटे मनोज को तलाशती रहीं।
मगरमच्छ के हमले में लापता युवक मनोज दो भाइयों में बड़ा था। उसकी शादी तय हो गई थी। लेकिन अगले वर्ष होनी थी। मनोज बड़ा बेटा था। इसके ऊपर परिवार की जिम्मेदारियांं भी थीं। वह किसी शहर में काम करता था। 15 दिन पूर्व घर आया था। युवक की मौत के बाद पिता पप्पू, माता कुमारी देवी और छोटे भाई दीपक का रो-रोकर बुरा हाल हो गया है।
हृदयविदारक घटना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। विलाप कर रही मां कह रही थी कि बेटा बोला कि अभी आ रहा हूं, उसे रोका, लेकिन उसने बात नहीं सुनी। अगर मां की बात मान गया होता तो शायद काल के गाल में नहीं समाता। इस घटना से गांव वाले भी मर्माहत हैं।
कोट
नेपाल से नहरों में पानी आ रहा है। मगरमच्छ आए होंगे। इसके पहले कभी कोई मगरमच्छ के हमले में लापता नहीं हुआ था। जिले की यह शायद पहली घटना है। मौके पर टीम बचाव कार्य में लगी है। बैराज से पानी कम किया जा रहा है। नहर से सटे दस किमी दूरी के गांवों में भी सूचना कर दी गई है। गांव से नाव की व्यवस्था की गई। लेकिन पानी का बहाव तेज होने से बचाव कार्य में देरी हुई।
-अनिल श्रीवास्तव, डीएफओ