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Kushinagar News: सूर्य मूर्ति के जलाभिषेक के लिए हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल ने टीम को किया रवाना

Fri, 07 Jul 2023 12:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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तुर्कपट्टी में भगवान सूर्य की प्रतिमा का प्राकट्य दिवस मनाने के लिए ​पूर्वांचल महोत्सव समिति के
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फोटो है।
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- कुशीनगर के तुर्कपट्टी स्थित भगवान सूर्य के मंदिर में 31 को सूर्य प्राकट्य दिवस पर मनाया जाएगा उत्सव
- पूर्वांचल महोत्सव समिति प्रमुख नदियों के संचित जल से सूर्य प्रतिमा का करेगी अभिषेक
- देवभूमि हिमाचल प्रदेश से बृहस्पतिवार को हुई जल संचयन की शुरुआत

संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। तुर्कपट्टी में भगवान सूर्य की प्रतिमा के प्राकट्य दिवस पर 31 जुलाई को आयोजित होने वाले सूर्य प्राकट्य उत्सव के दिन भगवान सूर्य की मूर्ति का अभिषेक किया जाएगा। इसके लिए देश की प्रमुख पवित्र एवं धार्मिक नदियों के जल का संकलन किया जाएगा।
इसकी शुरुआत देवभूमि हिमाचल प्रदेश से बृहस्पतिवार को की गई। वहां के राज्यपाल ने पूर्वांचल महोत्सव समिति के सदस्यों को पांचों नदियों के जल से भरे कलशों के साथ कुशीनगर के लिए रवाना किया। इस समिति में शामिल प्रधानाचार्य शैलेंद्र दत्त शुक्ल ने बताया कि सतलुज नदी, व्यास नदी, गिरी नदी, रावी नदी व अश्वनी नदी के जल का संकलन किया गया है।
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जिन्हें हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने अपने हाथों से बृहस्पतिवार को देकर प्रस्थान कराया। उन्होंने बताया कि हिमाचल राजभवन में पूर्वांचल महोत्सव समिति के अध्यक्ष विनय राय के साथ वह स्वयं तथा राम प्रकाश राय व नीरज राय शामिल थे। पवित्र नादियों से संकलित कलश को राज्यपाल के हाथों से प्राप्त किया।
राज्यपाल ने देवभूमि हिमाचल का जल लेने के लिए आयोजन समिति का आभार व्यक्त करते हुए अध्यक्ष विनय राय को इस अनूठे पहल के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह कार्य पूर्वांचल के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के महत्व को समझने एवं उनका संरक्षण करने में मील का पत्थर साबित होगा।शैलेंद्र दत्त शुक्ल ने बताया कि सूर्य मूर्ति प्राकट्य उत्सव एक ऐसा उत्सव है, जो एक साथ देश के समस्त धार्मिक आस्थाओं को जोड़ते हुए जीवन में जल के महत्व को भी रेखांकित कर रहा है। कुशीनगर के तुर्कपट्टी में 31 जुलाई को आयोजित होने वाले सूर्य मूर्ति प्राकट्य उत्सव के लिए देश की समस्त पवित्र एवं धार्मिक नदियों के जल का संकलन किया गया है। इस कलश यात्रा की शुरुआत ऋषियों की स्थली आजमगढ़ से 29 जुलाई को प्रारंभ होगी। क्योंकि ज्यादातर लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है की आजमगढ़ का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्त्व क्या है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अनुसूइया के तीनों सुपुत्र ऋषि दत्तात्रेय, ऋषि दुर्वासा और ऋषि चंद्रमा ब्रह्मा विष्णु महेश के अंशावतार थे। आजमगढ़ वह धरती है, जहां तीनों ऋषियों ने अपने तपोस्थली के लिए चुना। 29 तारीख की यात्रा का पड़ाव कुशीनगर के कसया का रामजानकी मंदिर होगा। 30 जुलाई को भगवान सूर्य प्राकट्य दिवस के दिन यह यात्रा साधु-संतों के नेतृत्व में जनमानस के साथ सूर्य स्थली तुर्कपट्टी के लिए प्रस्थान करेगी।
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31 जुलाई को खुदाई में मिली थी यह मूर्ति
कुशीनगर के तुर्कपट्टी में स्थित भगवान सूर्य की प्रतिमा गुप्तकालीन है। यह बेशकीमती काले नीलम से निर्मित है। इसे 31 जुलाई 1981 को खुदाई के दौरान प्राप्त किया गया था। इसकी पुष्टि पुरातत्व विभाग के निरीक्षण में भी की गई थी। खुदाई से पूर्व जिस स्थान पर मूर्ति प्रकट हुई, वहां पर सुदामा शर्मा का घर हुआ करता था। उनके स्वप्न में बार-बार मूर्ति की आकृति आने के बाद जब उन्होंने इसकी चर्चा स्थानीय लोगों से की। उसके बाद यहां पर खुदाई कराई गई। तब जाकर खुदाई के पांचवें दिन भगवान सूर्य की मूर्ति प्राप्त हुई। इसी अवसर पर 31 जुलाई को देश की पवित्र समस्त नदियों से एकत्र किए गए जल से भगवान सूर्य की मूर्ति का अभिषेक होगा। उसके बाद हवन, भंडारा और फिर समस्त नदियों के जल को मिलाकर धार्मिक अनुष्ठान में पधारे सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद के तौर पर इस अनूठे संगम जल का महाप्रसाद वितरण किया जाएगा।
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