गन्ना सर्वे : जिले में 3598 हेक्टेयर घटा गन्ना की खेती का रकबा
पडरौना (कुशीनगर)। पिछले कई वर्षों से गन्ना उत्पादन के मामले में समृद्ध रहे इस जिले में मौजूदा पेराई सत्र में रकबा कम हो गया है। पिछले वर्ष के मुकाबले 3598 हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। इसमें कमी आने की प्रमुख वजह को. 0238 प्रजाति के गन्ना में रेड रॉट और उकठा रोग लगना और इसकी वजह से फसल चक्र में बदलाव को माना जा रहा है।
मौजूदा पेराई सत्र के लिए जनपद में गन्ना का सर्वे पूरा हो चुका है। पिछले कई वर्षों से गन्ना उत्पादन में शीर्ष पर रहे को. 0238 प्रजाति के गन्ना में रेड रॉट और उकठा रोग लग जाने की वजह से किसानों का काफी नुकसान हुआ। इसका असर गन्ना के उत्पादन पर भी पड़ा है। इस प्रजाति को निष्प्रयोज्य घोषित कर दिए जाने के बाद अब दूसरी प्रजातियों जैसे को.शा. 8272 और को. 118 की बुवाई और इसके उत्पादन करने के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है। गन्ना की फसल को नुकसान और इस साल भी अत्यधिक बारिश के चलते गन्ना के उत्पादन में चार फीसदी की गिरावट आ गई है। पिछले साल 91117 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ना की खेती हुई थी, लेकिन इस साल सर्वे में 87519 हेक्टेयर गन्ना पाया गया है। इस तरह 3598 हेक्टेयर की कमी आई है।
जनपद में गन्ना की खेती की स्थिति-
जनपद में गन्ना किसानों की संख्या- 221973
गन्ना की खेती वाले गांवों की संख्या- 1570
जनपद के गांवों में गन्ना की खेती का प्रतिशत- शत प्रतिशत
बावग (प्लांट) गन्ना की खेती- 47231 हेक्टेयर
पेड़ी गन्ना की खेती- 40288 हेक्टेयर
कुल गन्ना की खेती का क्षेत्रफल- 87519 हेक्टेयर
जनपद में गन्ना की खेती का क्षेत्रफल पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष कम हुआ है। को. 0238 प्रजाति वाले खेतों में रोग लगने तथा पानी भर जाने से गन्ना की फसल को काफी नुकसान हुआ। इस साल भी अत्यधिक बारिश हुई है। को. 0238 को रिजेक्ट कर दिया गया है। उसकी जगह किसानों को को.शा. 8272 और को. 118 की खेती करने के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है। इस वजह से इस साल गन्ना के खेतों का रकबा कम हुआ है।
-वेद प्रकाश सिंह, जिला गन्ना अधिकारी