सत्रावसान की ओर चीनी मिलें, मार्च के अंत तक बंद कर देंगी पेराई
एक अरब 27 करोड़ 39 लाख रुपये से अधिक बकाया है किसानों का
छह अरब 27 करोड़ 51 लाख रुपये कीमत की हुई है गन्ना की पेेराई
कुशीनगर। मौजूदा पेराई सत्र में भी गन्ना का क्षेत्रफल कम होने के कारण चीनी मिलें सत्रावसान की ओर बढ़ चली हैं। जिले की एक चीनी मिल दस फरवरी को बंद हो गई, तो दूसरी 11 मार्च को। अन्य चीनी मिलें भी 30 मार्च के पहले बंद हो जाएंगी। इनमें दो चीनी मिलों ने गन्ना की पेराई के लिए सप्लाई टिकट फ्री कर दिया है, लेकिन कप्तानगंज चीनी मिल इस पेराई सत्र का एक रुपये भी भुगतान नहीं किया है। ढांढा और रामकोला चीनी मिल को छोड़कर अन्य की स्थिति भी ठीक नहीं है।
जिले में पांच चीनी मिलें हैं, लेकिन गन्ना की फसल में रोग और सूखने के चलते उत्पादन पर प्रभाव पड़ा है। पिछले पेराई सत्र में 91,117 हेक्टेयर में गन्ना की खेती हुई थी। इसमें 9,330 हेक्टेयर गन्ना की फसल सूख गई थी। मौजूदा पेराई सत्र में भी गन्ना किसानों ने 87,519 हेक्टेयर में खेती की थी, लेकिन करीब 20 हजार हेक्टेयर गन्ना की फसल सूख गई। इसका नतीजा यह हुआ कि चीनी मिलें फरवरी से ही बंद होने लगी हैं।
10 फरवरी को कप्तानगंज और 11 मार्च को हाटा चीनी मिल ने पेराई बंद कर दिया। सेवरही और खड्डा चीनी मिल ने भी गन्ना फ्री कर दिया है, ताकि सप्लाई टिकट की बाधाओं से मुक्त रहकर किसान अपना गन्ना सीधे मिल पर पहुंचा सकें। यदि यही स्थिति रही तो खड्डा और सेवरही चीनी मिलें 15 से 16 मार्च के आसपास पेराई बंद कर देंगी। रामकोला चीनी मिल भी 30 मार्च तक सत्रावसान कर सकती है। चीनी मिलों ने 62751.02 लाख रुपये के गन्ना की पेराई की है। इसमें 50011.59 लाख रुपये भुगतान कर दिया है। 12739.59 लाख रुपये गन्ना मूल्य अवशेष है।
जिले में गन्ना मूल्य भुगतान की स्थिति (गन्ना आपूर्ति लाख क्विंटल और धनराशि लाख रुपये में)
चीनी मिल गन्ना आपूति देय धनराशि भुगतान अवशेष
ढांढा 67.57 20656.44 19999.44 657.00
रामकोला (पी) 60.21 18364.61 19683.62 1319.01
कप्तानगंज 14.76 5151.25 0.00 5151.25
सेवरही 46.65 13637.31 5674.19 7963.12
खड्डा 6.42 4941.41 4654.34 287.07
योग 205.61 62751.02 50011.59 12739.43
भुगतान के मामले में कप्तानगंज चीनी मिल पीछे
गन्ना विभाग की मानी जाए तो भुगतान के मामले में कप्तानगंज चीनी मिल सबसे पीछे है। इस पर पिछले पेराई सत्र का 39.80 करोड़ रुपये बकाया था। विभाग की तरफ से जोर देने पर चीनी बेचकर इस मिल ने भुगतान तो किया, लेकिन अब भी 8.50 करोड़ रुपये किसानों को देना बाकी है। मौजूदा पेराई सत्र का एक रुपये भी भुगतान नहीं किया है।
कोट
कप्तानगंज मिल चीनी बेचकर भुगतान करती है। उस पर पिछले सत्र का 8.50 करोड़ रुपये बाकी है। सेवरही चीनी मिल को भुगतान में तेजी लाने के लिए निर्देश दिए गए हैं। ढांढा और रामकोला चीनी मिल का सीसीएल (कैश क्रेडिट लिमिट) है। इससे उन्हें बैंक से ऋण मिल जाता है और भुगतान कर देती हैं। आईपीएल की खड्डा चीनी मिल के भी कई स्रोत हैं।
वेद प्रकाश सिंह, डीसीओ