नक्सलियों से कई बार आमना-सामना करने वाले बगहां क्षेत्र में कई वर्ष तक तैनात रहे सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी शिवमुनी प्रसाद बताते हैं कि वर्ष 1999 के आसपास बगहां क्षेत्र के हरनाटाड़, रघिया, गोवर्धना आदि आदिवासी बाहुल्य जंगली क्षेत्र में एक अनजान व्यक्ति पहुंचा। उसका नाम व पता कोई नहीं जानता था। उसे स्थानीय लोग दिल्ली वाले मास्टर के नाम से पुकारते थे।
वह जगह-जगह झोपड़ी में स्कूल खोलकर आदिवासी (धांगड़) समुदाय के बच्चों को पढ़ाने लगा। इन स्कूलों की आड़ में बच्चों व उनके अभिभावकों को नक्सलवाद से जोड़ने का प्रयास शुरू किया। इसमें और नक्सली नेता बाहर से पहुंचकर संगठन के विस्तार में जुट गए।
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देखते ही देखते महर्षि वाल्मीकि व गांधी के चंपारण सत्याग्रह के लिए प्रसिद्ध यह पूरा इलाका लाल सलाम के लाल आतंक से घिर गया। गतिविधि बढ़ते ही दिल्ली वाला मास्टर लापता हो गया। उसका अब तक पता नहीं चल पाया।
बाद में नरेंद्र ओशे व संगीता आदि नक्सली नेता कमान संभाल लिए। नरेंद्र ओशे को शिवमुनी प्रसाद ने 2005 में गिरफ्तार किया था। एक मुठभेड़ में 150 से ज्यादा असलहे बरामद हुए थे। हालांकि, कुछ वर्षों से बिहार पुलिस व एसएसबी और एसटीएफ की सक्रियता से माओवादियों के हौसले कुछ पस्त जरुर हुए हैं, लेकिन अभी भी इनके पलटवार की आशंका बनी हुई है।
1999 में नक्सली पहली बार गोवर्धना थाना क्षेत्र के सेमरानी गांव में बिल्लर यादव की निर्मम हत्या कर सुर्खियों में छा गए थे। इसके बाद बगहां क्षेत्र के रतनपुरवा गांव निवासी विजय सिंह को दिनदहाड़े नौतन बाजार में पकड़कर जनता के सामने धारदार हथियार से काट डाला था।
विजय सिंह की हत्या के कुछ साल बाद नक्सलियों ने उनके घर को घेरकर डायनामाइट से उड़ा दिया था। मुसहरवा गांव में पुलिसकर्मियों पर हमला कर असलहा लूट लिए थे। सेमरानी गांव में पुलिस पिकेट लूट लिए थे।
भरथ यादव व भोला मियां की निर्मम हत्या कर दी थी। जिमरी वन कार्यालय को विस्फोट से ध्वस्त कर दिया था। गोवर्धना थाने के नवनिर्मित भवन को विस्फोट कर ध्वस्त कर दिया था। गोनौली पंचायत के पूर्व मुखिया मनोज सिंह के घर पर धावा बोलकर उनकी हत्या कर दी थी। नक्सलियों ने कुशीनगर के खड्डा क्षेत्र में पनियहवा रेल पुल को उड़ाने की धमकी देकर हड़कंप मचा दिया था। सुरक्षा के लिए अतिरिक्त फोर्स तैनात की गई थी।
राजस्व अभिलेख दुरुस्त करने के लिए गंडक नदी के किनारे महदेवा गांव में जमीन की पैमाइश कर रहे राजस्वकर्मियों को पैमाइश न करने की नक्सलियों ने धमकी दी थी। इसके लिए गांव के प्राथमिक विद्यालय में लाल सलाम का बैनर लगा दिया था।
नक्सलियों की आर्थिक नाकेबंदी के एलान पर कुछ वर्ष पहले तक गोरखपुर-नरकटियागंज रेलखंड पर ट्रेनों का आवागमन ठप पड़ जाता था। गिरफ्तार किए गए हार्डकोर नक्सली राजन और धीरज सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में शामिल थे।
10 जुलाई 2020 को बगहां क्षेत्र के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के चौथापानी जंगल में एसटीएफ, एसएसबी, बगहां पुलिस की संयुक्त टीम के साथ नक्सलियों की मुठभेड़ हुई थी। इसमें चार नक्सली मारे गए थे। तीन एसएलआर रायफल, कारतूस तथा कई प्रतिबंधित सामग्री बरामद हुई थी। इस गोलीबारी में एक दरोगा घायल हो गए थे। इस घटना में भी राजन व धीरज शामिल थे।
ये अपराधी यूपी से सटे वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल में अपना ठिकाना बना रखे थे। यहां हथियार छिपाकर रखते थे। मनोज सिंह की हत्या सहित बगहां के अलावा गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, सारण, गया, औरंगाबाद आदि जनपदों में नक्सली वारदात में ये दोनों शामिल थे।