मानसून के पहले ठोकरों की मरम्मत नहीं कराई गई तो उठानी पड़ सकती है परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीरोड। गंडक नदी की धारा से तटबंधों को दूर रखने के लिए नरवाजोत बांध से अहिरौलीदान तक अनेक ठोकर (स्पर ) बनाए गए हैं। इसमें अधिकांश ठोकर अपनी वास्तविक लंबाई खोकर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। जबकि इस साल चार ठोकरों की पुनर्स्थापना का कार्य चल रहा है। ऐसे में बांध के किनारे बसे गांवों के लोगों का कहना है कि अगर मानसून शुरू होने के पहले इन क्षतिग्रस्त ठोकरों की मरम्मत नहीं कराई गई तो परेशानी उठानी पड़ सकती है।
नरवाजोत से लगायत अहिरौलीदान तक गंडक नदी लगभग बीस किलोमीटर की लंबाई में बहती है। गंडक नदी से तटबंधों की सुरक्षा के लिए ठोकरों की भूमिका अहम मानी जाती है। इसी कारण विभाग ने 20-25 ठोकरों का निर्माण काफी पहले से कराया गया है। लोग बताते हैं कि ठोकर नदी की धारा को बांध से दूर रखने में सहायता करते है। नदी ठोकरों से टकरा कर बांध को सुरक्षित रखती है।
शुरुआती दौर में इन ठोकरों की लंबाई एक सौ से डेढ़ सौ मीटर थी। लेकिन बाढ़ के दौरान लगातार नदी का भारी दबाव झेलने के कारण गंडक नदी के किनारे बसे नरवाजोत, जंगलीपट्टी, बिनटोली, घघवा जगदीश, जवही दयाल, विरवट कोंन्हवलिया, बाकखाश, नोनिया पट्टी, बाघा चौर, अहिरौलीदान सहित गांवों के सामने बने ठोकरों में अधिकांश ठोकर जर्जर हो चुके हैं। उनकी लंबाई अब 40-50 मीटर तक सिमट कर रह गई है। हालांकि, पिछले दो तीन वर्षों में विभाग से कई क्षतिग्रस्त ठोकरों की पुनर्स्थापना का कार्य कराया गया है।
इन बांधों पर हो रहे कार्य
इस साल भी नरवाजोत में किमी 1.000 पर जंगलीपट्टी में किमी 2.400 पर, चैनपट्टी में किमी 3.300 पर बाकखाश में किमी 9.600 सहित चार ठोकरों का कार्य जेई चंद्रप्रकाश, जेई रमेशधर दुबे व जेई सुनील कुमार यादव की देखरेख में जारी है। लेकिन अभी भी ऐसे अनेक ठोकर है, जो क्षतिग्रस्त हैं। पिछले साल तो मानसून सत्र की शुरुआत में ही वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक नदी में चार लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ दिया गया था।
इसके चलते काफी अफरा-तफरी मच गई थी। क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य शर्मा यादव, ध्रुव निषाद, प्रदीप सिंह, प्रभुनाथ यादव, संजय सिंह, बृजकिशोर साहनी,पप्पू यादव,पुजारी सिंह सहित अन्य लोगों का कहना है कि विभाग को बांध की सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील व क्षतिग्रस्त ठोकरों पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। अन्यथा 15 जून से शुरू हो रहे मानसून सत्र में यह क्षतिग्रस्त ठोकर भी बांध की सुरक्षा के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं।
इस संबंध में बाढ़ खंड तृतीय के एसडीओ एसके प्रियदर्शी का कहना है कि फिलहाल चार ठोकरों की पुनर्स्थापना का कार्य चल रहा है। अन्य सभी संवेदनशील जगहों पर नजर रखी जा रही है।