पडरौना/सुकरौली। हाटा के पैकौली गांव के अजय की मौत ने माता-पिता को झकझोर कर रख दिया है। दिल के साथ घर और गांव के कोना-कोना वीरान कर दिया है। दोस्त के जैसे साया बनकर पिता लालमोहन की उम्मीदों को मजबूती देने वाले अजय का साथ छूटने से आरजू और अरमान सब टूटकर बिखर गए हैं। झुर्रियों से भरे पिता के चेहरे के साथ डबडबाई आंखे और उनकी लड़खड़ाती जुबान बेटे की कहानी को बयां करते-करते अचानक खामोश हो जा रही है। बड़े बेटे की मौत से मां और उनकी ममता चीख रही है। बहन भी भइया वापस आ जा... कहकर बेसुध दिखी। पैकौली गांव में लालमोहन पासवान के घर महीनों से चल रहा शादी का उत्साह था क्षण भर की उत्तेजना में आंसू और मातम में तब्दील हो गया। जिस घर में महीनों पहले से गांव की महिलाएं इकट्ठा होकर युवती की शादी के लिए संगीत से माहौल को खुशनुमा कर रहीं थी, वहां वह बिलखती हुई युवती के माता-पिता को साहस दे रही हैं। कल तक रिश्तेदारों और पड़ोसियों की आमद से गुलजार हुए चूल्हे की चिंगारियां बुझी हैं। पिता का कहना है कि अजय की मौत महज मौत नहीं ये मेरे जीवन की सबसे बड़ी पराजय है।
बताते हैं कि बड़े बेटा अजय के कम उम्र में ही जिम्मेदारी लेने के बाद बेटी के हाथ पीले करने और छोटे बेटे की पढ़ाई की टेंशन कम हो गई थी। अजय अपनी बहन की शादी के बाद ही शादी करना चाहता था, जबकि छोटे भाई सत्यम पासवान को समय-समय पर पढ़ाई के लिए प्रेरित करता रहता और पैसे के लिए हम बानी ना..कह कर आश्वासन देता रहता था। मां इसरावती रो-रोकर अचेत हो जा रही थी। दरवाजे पर आने-जाने वालों को देख बिलखती हुई अजय को बुलाने की बात कह रही थी। यह नजारा देख दरवाजे पर मौजूद लोगों की आंखें नम थीं।