फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kushinagar News: जनपद में धड़ल्ले से हो रहा अवैध मिट्टी खनन, जिम्मेदार है मौन

Wed, 14 Jun 2023 12:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
विज्ञापन
नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के नरचोचवा गांव के काली माता स्थान के समीप मट्टी खनन करते जेसीबी। स
विज्ञापन
कुशीनगर में बालू खनन से भरती है पुलिस की जेब, थानेदार पर दर्ज हो चुका है मुकदमा
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। प्रशासन के लाख दावों के बाद भी जिले में खेतों से अवैध मिट्टी खनन जारी है। जेसीबी व मिट्टी काटने वाली मशीन लगाकर खेतों से धड़ल्ले से मिट्टी खनन किया जा रहा है। खनन के बाद ट्रैक्टर ट्राॅलियों में भरकर मुख्य मार्गों से मिट्टी गंतव्य तक पहुंचाई जा रही है। जिम्मेदार तमाशबीन बने हुए है। इसमें अधिकतर मिट्टी कारोबारी के पास जा रही है। कारोबारी विभाग की मिलीभगत से रॉयल्टी की चोरी करते हैं।
मंगलवार की दोपहर दो बजे हाटा क्षेत्र के पड़री गांव के समीप टैक्टर ट्राॅली पर मिट्टी लोड किया जा रहा है। परमिट के बारे में पूछने पर चालक ने बताया कि इस क्षेत्र में मिट्टी बगैर परमिशन के होता है। इसी तरह सुकरौली, पड़री,खोट्ठा, अहिरौली, सरकारी गैर सरकारी जमीनो पर धड़ल्ले से खनन का धंधा चलता है।
विज्ञापन

अपराह्न तीन बजे जटहा बाजार थाना क्षेत्र के हिरनही में मिट्टी काटने वाली मशीन से खेत में मिट्टी की कटाई चल रही थी। 15 से अधिक ट्रैक्टर ट्राॅली से मिट्टी की ढुलाई चल रही थी। चार बजे नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के नरचोचवा में जेसीबी से मिट्टी खनन किया जा रहा था। 30 से अधिक ट्रैक्टर-ट्राॅली से ढुलाई हो रही थी।

हाटा में वनविभाग की भूमि पर खनन
हाटा क्षेत्र के वन विभाग की भूमि को भी नहीं छोड़ा जा रहा है। इसमें विभागीय अधिकारियों की संलिप्तता से इन्कार नहीं किया जा सकता है। जिम्मेदारों की इस अनदेखी के कारण राजस्व को भारी हानि पहुंच रही है। भले ही शासन-प्रशासन की ओर से अवैध खनन पर लगाम लगने का दावा कर रहे हों, लेकिन धरातल पर खनन का धंधा खूब फल-फूल रहा है। इससे खनिज संपदा के साथ-साथ राजस्व को चूना लगाया जा रहा है तो वहीं पर्यावरण को भी प्रदूषित करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जा रही है।

मुख्यमंत्री का आदेेश भी अफसरों ने अनसुना कर दिया
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश के बाद भी अफसर सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। जिससे अवैध खनन का धंधा खूब फल-फूल रहा है। पुलिस व खनन अधिकारियों से साठगांठ कर माफिया मिट्टी का खनन दिन-रात कर रहे हैं। यही नहीं, नदी व नालों से निकाले गए सफेद सोने को सरकारी जमीन पर डंप किया जा रहा है। जिस पर अफसर कार्रवाई करने के बजाय चुप्पी साधे हुए हैं। 24 मार्च को मुख्यमंत्री ने जिले के अफसरों को अवैध बालू खनन रोकने के निर्देश दिए थे। जिसे अफसरों ने अनसुना कर दिया।
रॉयल्टी की होती है चोरी, बंटता है हिस्सा
नियमों के मुताबिक, परमिट देते समय ही यह तय किया जाता है कि किस जगह पर कितनी गहराई तक खनन कराया जा सकता है। अगर किसी जगह पर चार फीट खनन का परमिट है, तो वहां 20 फीट खनन कर दिया जाता है। यानी 16 फीट मिट्टी ज्यादा निकाली जाती है और सरकारी खजाने में इसकी रायल्टी जमा नहीं होती है। जब भी शिकायत पर जांच होती है, उसे साठगांठ से दबा दी जाती है। बचने के लिए तर्क दिया जाता है कि उस जगह पर पहले से 16 फीट गड्ढा था, इस वजह से 20 फीट गहरा हो गया। यानी झूठे तर्क से नियम-कानून को खारिज कर अवैध खनन का खेल जारी रखा जाता है।

सिस्टम से जुड़ा है पूरा गिरोह
खनन विभाग के एक कर्मचारी ने नाम नहीं लेने के शर्त पर बताया कि इस तरह के अवैध खनन के खेल में सबसे अहम भूमिका खनन विभाग की होती है। विभाग की अनुमति के बिना यह संभव है नहीं। इसके लिए बाकायदा सरकारी सिस्टम से जुड़ा एक गिरोह काम करता है। विभाग का एक बाबू तय करता है कि कैसे और किसे परमिशन देनी है। इसके अलावा एक आदमी को परमिशन मिलते ही उसकी आड़ में तीन अन्य लोग जेसीबी से खनन कैसे करेंगे, यह भी वही तय करता है। फिर, संबंधित विभागों को साधा जाता है।
विज्ञापन


खनन के लिए परमिशन के ये हैं नियम
-परमिशन लेने वाले को ऐसी जगह से मिट्टी निकालनी होती है, जहां पर कोई
सड़क, सार्वजनिक मार्ग, भवन या सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान न हो
- तय मानक से अधिक मिट्टी निकालने पर यह अवैध खनन होगा
- परमिशन के बाद भी अगर सरकार, न्यायालय का कोई नया आदेश आएगा तो उसका पालन करना होगा
- खनन के आसपास के खेतों को कोई नुकसान नहीं होना चाहिए
- खनन वाली जगह पर अगर पेड़ हो तो उसे नुकसान न पहुंचे
- पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण पत्र के प्रभावी नियमों अधिसूचना एवं शर्तों के अनुसार खनन संविदा की जाएगी
वर्जन
कहीं भी अवैध खनन नहीं हो रहा है। सभी जगहों पर खनन करने वाले लोगों ने परमिट ले रखा है। बिना राॅयल्टी जमा कराए ईंट भट्ठा वाले मिट़टी की खुदाई करते



हैं, ऐसी शिकायतें आई हैं, उनकी जांच कराई जा रही है। कामर्शियल कामों के लिए अनुमति की जरूरत होती। ईंट भट्ठे के लिए परमिशन अनिवार्य रहती है। इसमें भी मानक से अधिक गहराई की खुदाई होती है तो किसान को तत्काल शिकायत करनी चाहिए है। कुम्हार को गिला मिट्टी तालाब से लेकर आते है उनके लिए कोई परमिशन की आवश्यकता नहीं होती है।
-देवीदयाल वर्मा, एडीएम
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें