कुशीनगर। हाईवे पर सख्ती के बाद अब बैग और अन्य छोटे पैकेट से शराब की तस्करी बढ़ गई है। कसया बस स्टैंड पर 96 बोतल अंग्रेजी शराब के साथ संजीत यादव (22) को रविवार को पुलिस ने गिरफ्तार किया। इस तरह की गिरफ्तारी उस अवैध नेटवर्क की एक अहम कड़ी है, जो सीमावर्ती जिलों से संचालित हो रहा है। पुलिस जांच में सामने आ रहा है कि शराब तस्करी अब बड़े ट्रकों की बजाय छोटे, सुरक्षित और कम जोखिम वाले तरीकों से की जा रही है।
जिले में अवैध शराब की तस्करी के मामले तो तमाम आ रहे हैं। अभी चार दिन पहले तमकुहीराज पुलिस ने लग्जरी कार में तस्करी कर ले जाई जा रही 24 कार्टून हरियाणा निर्मित अंग्रेजी शराब बरामद किया था। फेहरिस्त काफी लंबी है, लेकिन रविवार को कसया में पकड़ा गया मामला अलग तरह का है। पकड़ा गया युवक दो पिट्ठू बैग में 96 बोतलें लेकर बस के जरिए बिहार जाने की तैयारी में था।
पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि शराब यूपी से खरीदी गई थी और बिहार में ऊंचे दामों पर खपाने की योजना थी। यही तरीका हाल के महीनों में सामने आए लगभग सभी मामलों में देखने को मिला है। 96 बोतल के साथ पकड़ा गया युवक इस नेटवर्क की केवल ऊपरी परत है। असली सवाल यह है कि क्या आने वाले दिनों में पुलिस इस तस्करी की जड़ तक पहुंच पाएगी।
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छोटा कैरियर, बड़ा नेटवर्क
जानकार सूत्रों के मुताबिक तस्करी के इस नेटवर्क में हर व्यक्ति की भूमिका तय है। एक वर्ग ठेकों या डंप प्वाइंट्स से शराब उठाता है, दूसरा वर्ग सीमावर्ती इलाकों तक उसे पहुंचाता है, जबकि तीसरा वर्ग कैरियर के रूप में बस, ट्रेन या बाइक से शराब बिहार ले जाता है। पकड़े जाने पर अक्सर कैरियर ही सामने आता है, जबकि असली संचालक पर्दे के पीछे रहते हैं।
पहले जहां ट्रकों और पिकअप वाहनों का इस्तेमाल होता था, वहीं अब तस्कर छोटे बैग, स्कूल बैग, ट्रॉली बैग और बाइक की डिक्की का सहारा ले रहे हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार पिछले कुछ महीनों में कसया, हाटा, तमकुहीराज और कप्तानगंज क्षेत्रों से ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें 40 से 100 बोतल तक की खेप बरामद हुई है।
धंधे में युवक भी शामिल
बिहार में शराबबंदी के कारण शराब की कीमत कई गुना बढ़ जाती है। प्रदेश में 600-700 रुपये में मिलने वाली बोतल बिहार पहुंचते‑पहुंचते 1800 से 2500 रुपये तक बिकती है। यही भारी मुनाफा युवाओं को कैरियर बनने के लिए आकर्षित कर रहा है। कई मामलों में बेरोजगार या सीमांत मजदूर वर्ग के युवक इस धंधे में फंसते जा रहे हैं।
पुलिस कर रही कार्रवाई
कसया सीओ कुंदन सिंह के अनुसार अवैध शराब तस्करी के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। हर मामले में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि शराब कहां से लाई गई और किसे सप्लाई की जानी थी। हालांकि, इंटर‑स्टेट नेटवर्क होने के कारण जांच जटिल हो जाती है। पुलिस को संदेह है कि कुछ स्थानों पर अस्थायी डंप प्वाइंट भी बनाए गए हैं, जहां से शराब छोटी खेप में आगे भेजी जाती है।