पडरौना। मेडिकल कॉलेज से एसओजी टीम ने शुक्रवार को छह दलालों को दबोचा। इसमें मेडिकल स्टोर संचालक भी शामिल हैं। पुलिस की कार्रवाई के बाद दलालों और आसपास के मेडिकल स्टोर संचालकों में हड़कंप मच गया और दुकानें बंद हो गईं। हिरासत में लिए गए दलालों से पुलिस पूछताछ कर रही है। प्रारंभिक पूछताछ में कई और दलालों और स्वास्थ्यकर्मियों के करीबियों के नाम सामने आए हैं।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन के शिकंजा कसने के बाद भी दलालों का तिलिस्म नहीं टूट रहा था। पर्ची काउंटर से डॉक्टरों के चेंबर, दवा काउंटर और जांच केंद्रों तक फैले दलालों के नेटवर्क से मरीज नहीं बच पाते थे। बेहतर इलाज का झांसा देकर मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजते थे या डॉक्टर से दिखाने, जांच जल्दी कराने के लिए मरीजों का आर्थिक शोषण करते थे। मेडिकल कॉलेज के आस-पास संचालित करने वाले मेडिकल स्टोर संचालक या इनके लोग स्वास्थ्यकर्मियों की सांठगांठ से निजी कंपनियों का दवा लिखवाकर मरीजों को दवा बेचते हैं। दलालों के चंगुल में मरीजों के लगातार फंसने की शिकायत के बाद मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने एसपी से शिकायत की थी। एसपी के निर्देश पर एसओजी टीम दो दिनों से मेडिकल कॉलेज की रेकी करने के बाद शुक्रवार को डॉक्टर के 25 नंबर चैंबर, दवा वितरण काउंटर, ओपीडी, ओटी के बाहर से छह दलाल को दबोच लिया। इसकी भनक लगने पर बाकी दलाल भाग निकले और अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। एसओजी टीम रविंद्र नगर थाने में रखकर दलालों से पूछताछ कर रही है। सूत्रों की माने तो कई स्वास्थ्यकर्मियों के कई करीबियों के नाम सामने आए हैं। दलालों ने कमीशन के चक्कर में मेडिकल कॉलेज में होने वाली दलाली की पूरी कहानी बताया है। पुलिस इस खेल में शामिल अन्य लोगों की तलाश कर रही है।
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चहारदीवारी पर बैठक कर बेचते हैं दवाएं
-मेडिकल कॉलेज के चारों तरफ चहारदीवारी है। चहारदीवारी के बाहर दस से अधिक मेडिकल स्टोर संचालित होते हैं और चहारदीवारी पर बैठकर दलालों के माध्यम से दुकानदार दवाइयां बेचते हैं। इसके पहले भी इन दुकानदारों को कई बार हिदायत मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से दिया जा चुका है। लेकिन अपनी आदत से बाज नहीं आते हैं। मेडिकल कॉलेज के पश्चिम तरफ की चहारदीवारी कुछ माह पहले गिर गई। इधर से निजी एंबुलेंस लाने का रास्ता दलालों ने बना रखा है। पोस्टमार्टम हाउस और कैंपस में संचालित आयुर्वेद अस्पताल के पास भी चहारदीवारी पर ओपीडी से मरीजों की पर्ची लेकर कर दवा दलालों के माध्यम से मेडिकल स्टोर संचालक बेचते हैं।
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दलालों की पहचान करने में लग गए दो दिन
-एसओजी टीम पहले दिन मेडिकल कॉलेज पहुंची और पूरे दिन एक-एक वार्ड की रेकी की। लेकिन, दलालों और स्वास्थ्यकर्मियों में टीम को फर्क नहीं समझ में आया। दो दिन तक टीम दलालों और स्वास्थ्यकर्मियों में फर्क समझने में लग गया। पुलिस की माने तो ओपीडी से लेकर ओटी तक दलालों का बोलबाला है। लोगों में चर्चा है कि बिना स्वास्थ्यकर्मियों सह मिले दलालों की मेडिकल कॉलेज में इतना हस्तक्षेप नहीं हो सकता है। कुछ दिन पहले प्राचार्य की जांच में एक स्टॉफ नर्स ने एक महिला डॉक्टर समेत कई स्वास्थ्यकर्मियों का नाम और निजी अस्पताल में मरीजों को भेजने की कहानी पूछताछ में बता चुकी थी।
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दलालों को संरक्षण देने वालों पर भी हो सकती है कार्रवाई
-दलालों को एसओजी टीम जब हिरासत में लेकर चली गई तो कई स्वास्थ्यकर्मियों की सांस फूलने लगी। पुलिस की पूछताछ में दलालों को संरक्षण देने वाले स्वास्थ्यकर्मी और मेडिकल स्टोर संचालक का नाम सामने आया है। दलालों को संरक्षण देने वालों का नाम भी पुलिस कार्रवाई में शामिल कर सकती है। हालांकि, की पुलिस मेडिकल कॉलेज में सक्रिय दलालों पर बड़ी कार्रवाई करने की मूड में हैं और इससे जुड़े तथ्य जुटा रही है।
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-मेडिकल कॉलेज से छह दलालों को हिरासत में लिया गया है। इनसे पूछताछ चल रही है। इसमें शामिल अन्य लोगों का भी नाम सामने आ रहा है। पूछताछ के दौरान जो बातें सामने आ रही है। उस आधार पर जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस रैकेट में शामिल बाकी लोगों की जानकारी पुलिस जुटा रही है। -धवल जायसवाल एसपी
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-मेडिकल कॉलेज में दलालों की सक्रियता की शिकायत हर रोज मिल रही थी। मेडिकल कॉलेज प्रशासन कई बार इसे रोकने का प्रयास किया। लेकिन दलाल मान नहीं रहे थे। इसकी शिकायत एसपी से की गई थी। पुलिस ने कुछ दलालों को हिरासत में लिया है। पुलिस मामले की जांच कर रह है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन जितना हो सकेगा। उतना पुलिस की कार्रवाई में सहयोग करेगा। -डा. आरके शाही प्राचार्य मेडिकल कॉलेज