एसआईआर की वजह से खड्डा क्षेत्र के रहने वाले तैयब को अपने गांव की याद आई और वह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ घर लौट आए हैं। 45 साल पहले वह परिजनों से नाराज होकर घर छोड़कर चले गए थे। उनके घर लौटने पर परिजनों का खुशी का ठिकाना नहीं है। परिजन उन्हें मरा हुआ मान बैठे थे।
खड्डा थाना क्षेत्र के ग्राम सिसवा गोपाल गांव निवासी सैयद के दरवाजे पर बुजुर्ग सा दिखने वाला एक व्यक्ति अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ पहुंचा तो सभी का आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा, क्योंकि वह व्यक्ति कोई और नहीं 45 साल पहले घर छोड़कर चला गया तैयब था।
बड़े भाई तैयब को देखकर सैयद की आंखें भर आईं। यह खबर जैसे ही गांव में फैली लोगों की भीड़ जुट गई। तैयब के पुराने मित्र व पड़ोसी जो अब खुद बुजुर्ग हो गए हैं। गले मिलकर व पुरानी बातें याद कर भावुक हो गए। छोटे भाई सैयद व इनके परिवार ने खुशी-खुशी तैयब और उनके परिवार को अपना लिया है।
गांव वालों का कहना है कि एसआईआर ने 45 वर्ष से बिछड़े तैयब को अपनों से मिला दिया। तैयब सहित इनके परिवार के लोग एसआईआर अभियान की खूब तारीफ कर रहे हैं। तैयब की पत्नी मैरून व पुत्र इल्ताफ (14) व बेटी तबस्सुम (11) अपने असली घर व परिजनों से मिलकर काफी खुश हैं।
तैयब व मैरून निशा की शादी की भी दिलचस्प कहानी
तैयब बताते हैं कि कैराना के दोस्त का अचानक इंतकाल हो गया। जब वह था तब अक्सर उसके घर आना-जाना होता था। दोस्त की शादी मैरून निशा से हुई थी। मैरून का मायका बिहार के भागलपुर जिला (अब बांका) के सासन गांव में था। तैयब बताते हैं कि दोस्त का इंतकाल हो जाने से मैरून बेसहारा हो गई। इसके चलते वर्ष 2011 में दोनों ने निकाह कर लिया।