औराताल। खेती की नई-नई तकनीक आने से कृषि कार्य आसान हो रहा है और किसानों को फायदा भी मिल रहा है। उन्हीं तकनीक में सीड ड्रिल मशीन से गेहूं की बुवाई शामिल है।
कृषि विभाग के करुणाशंकर त्रिपाठी ने बताया कि सीड ड्रिल मशीन से खेतों में गेहूं की बुवाई की जाती है तो 10 से 12 किलो प्रति बीघे के हिसाब से गेहूं की बुवाई होती है। जबकि छींट विधि से प्रति बीघा 18 से 24 किलोग्राम गेहूं लग जाता है। अगर मशीन द्वारा गेहूं की बुवाई की जाए तो 8 से 12 किलोग्राम की बचत होगी। इसी तरह खाद की भी बचत होगी। इस विधि में सबसे बड़ा फायदा यह है कि जहां पर गेहूं का बीज गिरता है उसी के पास खाद भी पड़ती है जबकि छींट विधि में बीज कहीं और खाद कहीं पड़ जाती है।
उन्होंने कहा कि किसानों को जागरूक करने की जरूरत है, जिससे किसान कम लागत में अधिक अन्न की पैदावार दे सके। उन्होंने बताया कि संगवार में शनिवार को प्रगति शील किसान गिरजेश बहादुर सिंह, हरि कुमार सिंह, हरिश्चंद्र सिंह, रजत सिंह आदि ने सीड ड्रिल विधि से गेहूं की बुवाई की।