पडरौना। गुरवलिया बाजार क्षेत्र के बरवा राजापाकड़ के सपही बरवा टोला में आयोजित रामकथा के दूसरे दिन शिव-पार्वती विवाह की कथा सुनाई गई। कथा वाचक आचार्य विनय पांडेय ने कहा कि तारकासुर के अंत के लिए शिव-पार्वती का विवाह हुआ।
कथा वाचक ने कहा कि सती दहन के बाद भगवान शिव सत्तासी हजार वर्ष के लिए समाधि में चले गए। इधर सती का जन्म पार्वती के रूप में राजा हिमाचल के घर हुआ। तारकासुर का अंत करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव के विवाह की योजना बनाई। देवताओं ने कामदेव को भगवान शिव के पास भेजा। शिव की समाधि टूटी तो कामदेव जलकर भस्म हो गए। इसके बाद उन्होंने शिव-पावर्ती के विवाह की कथा विस्तार से सुनाई। पंडित दीपक मिश्र ने वाल्मीकि रामायण का पाठ भी किया। इस दौरान अंजली मिश्रा, सुरेश साधु, नंदकिशोर गुप्ता, राघव, कलावती आदि मौजूद रहीं।