धनघटा। क्षेत्र के रामपुर उत्तरी में चल रहे शतचंडी महायज्ञ के आखिरी दिन कथा व्यास ने कृष्ण सुदामा के मित्रता का वर्णन करके श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। बृहस्पतिवार को कथा स्थल पर भंडारा का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं में प्रसाद ग्रहण किया।
कथावाचक सूर्यकांताचार्य ने कहा कि ईश्वर धन और वैभव के नहीं बल्कि सच्चे प्रेम और समर्पण के भूखे हैं। जब द्वारिका धीश ने अपने निर्धन सखा के चरण पखारे तो यह दृश्य जीवंत हो उठा और पूरा पंडाल जय श्रीकृष्ण के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। कथा को आगे बढ़ाते हुए कथावाचक ने कहा कि भगवान जब जब धरती पर अवतरित हुए हैं, तब-तब धरती का भार पापियों के दुराचार से हल्का हुआ है। उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण और प्रभु श्री राम धरती पर आकर मानव को एक दूसरे से मिलकर साथ रहने का संदेश दिए हैं। जिंदगी में खुशहाल रहना है तो भगवान के बताएं और दिखाएं रास्ते पर चलने की जरूरत है। इस मौके पर प्रेम नारायण सिंह, धनपत ओझा, सौरभ तिवारी, राम लखन, भगवानदास, आदित्य कुमार, राम सिंह, जगन्नाथ आदि लोग मौजूद रहे।