बौद्ध धर्म के मूल सिद्धांतों से रू-ब-रू होंगे प्रतिभागी, 17 जुलाई तक चलेगा प्रशिक्षण शिविर
कसया। श्रीलंका बुद्ध विहार में शुक्रवार को भिक्षु संघ कुशीनगर के सचिव भंते डॉ. नंद रतन महाथेरो का जन्मोत्सव मनाया गया। भगवान बुद्ध का पूजन-वंदन कर सात दिवसीय श्रामणेर पब्बज्जा शिविर का शुभारंभ किया गया। बड़ी संख्या में उपासक-उपासिकाओं एवं श्रामणेर भिक्षुओं ने भाग लिया। थाई मॉनेस्ट्री के प्रमुख फ्रा राजबोधी विदेश ब्रज मुनि और म्यांमार बुद्ध विहार के प्रमुख भंते नंदका के संरक्षण में आयोजित कार्यक्रम में भिक्षुओं ने भंते डॉ. नंद रतन महाथेरो को जन्मदिवस की शुभकामनाएं दीं और उनके दीर्घायु एवं उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।
आयोजक भंते डॉ. नंद रतन महाथेरो ने कहा कि बौद्ध धर्म के मूल सिद्धांतों में ही मानव कल्याण और विश्व शांति का मार्ग निहित है। उन्होंने कहा कि शिविर का उद्देश्य बौद्ध धर्म की शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार करते हुए नैतिक जीवन मूल्यों को बढ़ावा देना तथा प्रतिभागियों को भगवान बुद्ध के उपदेशों एवं आदर्श जीवन शैली से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि सात दिवसीय शिविर में प्रतिभागियों को बौद्ध धर्म का अध्ययन, उपासना पद्धति, ध्यान-साधना, श्रामणेर भिक्षुओं की दैनिक दिनचर्या, पंचशील और आर्य अष्टांगिक मार्ग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। शिविर का समापन 17 जुलाई को होगा।
कार्यक्रम में सह-आयोजक भंते सुमेध थेरो, भिक्षु संघ के उपाध्यक्ष भिक्षु शील प्रकाश, भिक्षु अशोक, भिक्षु महेंद्र, भिक्षु आलोक, डॉ. भिक्षु तेजेंद्र, इंद्र श्री, डॉ. निगम ब्रजेश, डॉ. रामजी राव, विजय रतन, रामकृपाल, हरेकृष्ण कुशवाहा, धावक रवि मौर्य, अरविंद कुशवाहा आदि भिक्षु एवं श्रद्धालु मौजूद रहे।