दुदही। कस्बे के सुराजी बाजार स्थित श्रीराम जानकी मंदिर में चल रहे श्रीराम कथा के पांचवें दिन मंगलवार को कथावाचक अतुल कृष्ण भारद्वाज ने श्रीराम विवाह,धनुष भंग और परशुराम-लक्ष्मण संवाद की मार्मिक कथा सुनाई। कथा का श्रवण कर पंडाल में बैठे श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।
कथावाचक ने कहा कि ऋषि विश्वामित्र की आज्ञा से श्रीराम की तरफ से धनुष भंग करना इस बात का प्रतीक था कि अब संसार में राक्षसी वृत्तियों का नाश होना निश्चित है। उन्होंने श्रोताओं को प्रेरित करते हुए कहा कि ईश्वर कण-कण में व्याप्त हैं। इसलिए दीन-दुखियों,वनवासियों और आदिवासियों के कष्टों का दूर करना ही ईश्वर की सच्ची सेवा है। उन्होंने हनुमान जी के नेतृत्व में वनवासियों की ओर से किए गए कार्यों का नजीर देते हुए समाज से ऊंच-नीच,छुआछुत और भेदभाव मिटाने व संगठित होकर सामाजिक बुराइयों के खिलाफ खड़े होने का आह्वान किया। इस मौके पर गिरिजेश जायसवाल, विंध्याचल मित्तल, रामकुमार जायसवाल आदि मौजूद रहे।