खड्डा। साइबर ठग रंजित के जिगरी दोस्त और गैंग के शातिर सरवरे आलम की तलाश पुलिस ने शुरू कर दी है। अभी तक उसका पता नहीं चल सका है। आर्थिक तंगी से उबरने के लिए गांवों में घूमकर सिम कार्ड बचने वाले सरवरे की पांच सालों में दशा बदल गई। गांव में पक्का मकान, महंगी बाइकें और पांच बीघा से अधिक लोगों का खेत भी बंधक रख लिया है। दूसरी ओर आरोपियों के रिश्तेदारों के बारे में पुलिस अब जानकारी जुटा रही है। पुलिस की ओर से हुई कार्रवाई में सह नामजद आरोपी भी हैं।
खड्डा थाना क्षेत्र के ग्राम पकड़ी बृजलाल के पश्चिम टोला निवासी सरवरे आलम तीन भाइयों में सबसे छोटा है। बताया जाता है कि पांच वर्ष पहले वह बाइक से गांव गांव घूमकर मोबाइल का सिम कार्ड बेचता था। फिर बीच में कुछ दिन के लिए बाहर चला गया। कभी कभी गांव आता रहता था, लेकिन किसी से ज्यादा बात नहीं करता था और पड़ोसियों से भी कटा कटा रहता था। अचानक इसके परिवार के आर्थिक हालात बदलने लगे। पक्का मकान बन गया। महंगी तीन बाइकें, नया ट्रैक्टर खरीद लिया। दो साल के अंदर गांव के जरूरतमंद लोगों की जमीन पांच बीघा से अधिक बंधक रखा है। हांलाकि इसके दो भाई विदेश आते-जाते हैं। वर्तमान में एक भाई अभी विदेश है। पुलिस की जांच में आय से अधिक संपत्ति को साइबर क्राइम के अवैध कमाई से जोड़ा जा रहा है जो संपत्ति कुर्क हो सकती है। पुलिस ने गैंग के पर्दाफाश के बाद तुर्कहा गांव के रंजीत यादव सहित चार लोग जेल भेज दिया है, लेकिन सरवरे आलम अभी फरार है। इसके पकड़े जाने पर साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए सिमकार्ड के बारे में जानकारी होगी और जांच का दायरा बढ़ सकता है। पुलिस के रडार पर इस गांव सहित क्षेत्र के कई युवकों का नाम सामने आ रहा है। पुलिस आरोपियों से जुड़े बैंक खातों का डिटेल खंगाल रही है। इसमें कई तरह के रुपये आए हैं और लोकल के बैंक खातों में भेेजे गए हैं।